अन्नकूट पर 400 साल पुराने हनुमान मंदिर की कहानी: इतना भारी चोला छोड़ा कि 25 लोगों से नहीं उठा…

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इंदौरएक घंटा पहलेलेखक: अमित सालगट
2 नवंबर को आंवला नवमी है। इंदौर के कई मंदिरों में भंडारे व अन्नकूट का आयोजन किया जा रहा है। आज हम आपके लिए लेकर आए हैं इंदौर के 400 साल पुराने मंदिर का अनोखा किस्सा। इसके बारे में आपने शायद ही सुना होगा। इसमें एक किस्सा तो ऐसा है, जिसके बारे में बहुत ही कम लोगों को पता है।आपको बताते है इंदौर का 400 साल पुराना मंदिर कौन सा है…
हम बात कर रहे हैं इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में पंचकुईया स्थित राजाधिराज श्री वीर अलिजा हनुमान मंदिर, वीर बगीची की। इस मंदिर का इतिहास 400 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर से सैकड़ों भक्तों की आस्था जुड़ी है। मंदिर जितना पुराना है उसके किस्से भी उतने ही अनोखे है। ये बात बहुत ही कम लोग जानते है कि यहां भगवान हनुमान की जो प्रतिमा है वह कई सालों पहले तक एक मंजिल नीचे तलघर में थी। यहीं एक ऐसा मंदिर है जहां रोजाना आधा किलो भांग का भोग भगवान हनुमान को अर्पित किया जाता है।
अब बात करते है मंदिर में हनुमान प्रतिमा की…
मंदिर में भगवान हनुमान की प्रतिमा स्वयंभू है। खजूर के पेड़ के नीचे यह प्रतिमा निकली थी। काले पाषाण की भगवान हनुमान की ये प्रतिमा वीर मुद्रा में है। भगवान हनुमान के एक हाथ में गदा तो दूसरे हाथ में भगवान पर्वत उठाए हुए है। प्रतिमा की ऊंचाई 5 फीट तो चौड़ाई 3 फीट है। यह प्रतिमा पश्चिम मुखी है। यहां की मान्यता है कि यहां आने और अर्जी लगाने पर भक्तों की मनोकामना जल्द पूरी होती है। सैकड़ों भक्तों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी है और रोजाना बड़ी संख्या में भक्त यहां भगवान के दर्शन करने आते है।
मंदिर का इतिहास भी है अनूठा
400 साल पहले हनुमान जी का प्राकट्य हुआ। यहां के सबसे पहले गुरु श्रीश्री 1008 कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज नेपाल से आए थे। जिन्होंने यहां तप किया। महाराज तुकोजीराव भी यहां आते थे। जानकारों ने बताया कि महाराज की मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने एक मार्ग का नाम भी कैलाश मार्ग रख कर सम्मान किया था। कैलाशानंद महाराज के शिष्य हुए श्रीश्री 1008 औंकारानंद ब्रह्मचारी जी महाराज। उन्होंने ने भी इस भूमि पर तप किया। यहां का विकास काम किया। औंकारानंद जी महाराज को स्वप्न आया था कि वे बद्रीविशाल का मंदिर बनवाए। हालांकि उनका ये स्वप्न औंकारानंद महाराज के शिष्य श्रीश्री 1008 प्रभुवानंद ब्रह्मचारी महाराज ने पूरा किया। 1925 से लेकर 2017 तक उन्होंने मंदिर की गादी संभाली। करीब 108 वर्ष की उम्र में वे ब्रह्मलीन हुए। इनके बाद अब वर्तमान में पवनानंद ब्रह्मचारी महाराज गादिपति है।

आधा किलो भांग का लगता है भोग
मंदिर के पुजारी पवनानंद ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि यह इकलौता ऐसा मंदिर है जहां भगवान हनुमान को आधा किलो भांग का भोग रोजाना लगाया जाता है। आमतौर पर भगवान भोलेनाथ को भांग का प्रसाद अर्पित किया जाता है। मगर पुजारी का दावा है कि यह विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी को भांग का भोग अर्पित किया जाता है।
एक मंजिल नीचे थी हनुमान जी की प्रतिमा
पुजारी पवनानंद ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि श्रीश्री 1008 कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज और औंकारनंद ब्रह्मचारी महाराज हनुमान जी की इस प्रतिमा को ऊपर लेकर आए थे। उस वक्त प्रतिमा एक मंजिल नीचे थी। उस वक्त काफी कोशिश के बाद भी प्रतिमा उठ नहीं रही थी। तब महाराज जी ने ब्राह्मण भोज कराने का संकल्प लिया था। इसके बाद प्रतिमा को तलघर से हटाया जा सका। इसी प्रकार 1985 में हनुमान जी ने चोला छोड़ा था। उस वक्त 25 लोगों ने चोला हटाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं उठा सके। उस दौरान श्रीश्री 1008 प्रभुवानंद ब्रह्मचारी महाराज ने भगवान से विनती की जिसके बाद उस चोले को उठाया जा सका।

पहले तल मंजिल में यहां विराजित थी भगवान की प्रतिमा।
बद्री विशाल का मंदिर भी हनुमान जी के सामने
उन्होंने बताया कि हनुमान जी की मंदिर के ठीक सामने बद्री विशाल का मंदिर है। उनका दावा है कि उत्तराखंड के बाद यहां पर मंदिर को बनाया गया। मंदिर परिसर में ही शिव जी का संतानेश्वर महादेव मंदिर भी बना है। यहां की मान्यता है कि जो भी यहां मनोकामना करता है उसके यहां संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही मंदिर में 400 सालों से निरंतर अखंड प्रज्ज्वलित धुना है। यहां बैठकर मंदिर के सभी गादीपति ने तपस्या कर चुके हैं।
अन्नकूट परंपरा भी सालों पुरानी
उनका दावा है कि अन्नकूट परंपरा भी इसी मंदिर से शुरू हुई है। सबसे पहले महाराज यानी श्रीश्री 1008 कैलाशानंद महाराज ने इस मंदिर में अन्नकूट की परंपरा शुरू की थी। मंदिर में आंवला नवमी और हनुमान जयंती पर दो बड़े आयोजन किए जाते है। हनुमान जयंती पर लाखों रुपए के स्वर्ण आभूषण से भगवान का श्रृंगार किया जाता है। साथ ही यहां भगवान का विभिन्न त्योहारों पर भव्य श्रृंगार होता है। आंवला नवमी के दिन यहां अन्नकूट का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें करीब 20 हजार से ज्यादा भक्त भोजन करेंगे।

डोरा-ताबीज के भी चर्चे
उन्होंने बताया कि मंदिर में डोरा-ताबीज और झाड़न के लिए काफी बच्चे आते है। मंगलवार और शनिवार को यहां डोरा-झाड़न दी जाती है। उन्होंने कहा कि यहां का ताबीज विदेशों तक जाता है। मंदिर में गौशाला है, जिसमें 50 गाय है। वहीं यहां पर पाठशाला भी है। यहां 10 से 12 बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं।

अन्नकूट में पर्यावरण बचाने का संदेश
यहां होने वाले अन्नकूट महोत्सव में पर्यावरण बचाने का संदेश दिया जाएगा। यहां अन्नकूट महोत्सव में डिस्पोजल और प्लास्टिक को बैन किया गया है। यहां स्टील के ग्लास में ही भक्तों को पानी दिया जाएगा। इसके लिए पांच हजार स्टील के ग्लास भी भक्त मंडल द्वारा खरीदे। यहां आने वाले भक्तों को हरे पत्ते पर प्रसादी परोसी जाएगी। इस अन्नकूट में बीस हजार से ज्यादा भक्तों के आने की संभावना है। इस अन्नकूट में सौ से ज्यादा भक्त पूरी व्यवस्थाओं को संभालेंगे। मंदिर में अन्नकूट महोत्सव को लेकर साज सज्जा भी की जाएगी। भगवान को छप्पन भोग भी अर्पित किया जाएगा। महोत्सव का निमंत्रण सोशल मीडिया पर भी दिया जा रहा है। अन्नकूट महोत्सव में 10 महाराज और 20 से ज्यादा उनके सहयोगी भोजन व्यवस्था संभालेंगे।
भक्तों ने बताई भगवान की महिमा
भक्त धीरज गोयल ने बताया कि वे पिछले कुछ दिनों से ही मंदिर में आ रहे है। मगर यहां भगवान की प्रतिमा को जो चमत्कार देखा है वह कहीं और नहीं देखा। यहां इतनी सिद्धि है कि कैसा भी दु:ख, दर्द हो ठीक हो जाता है। मंदिर में आकर शांति महसूस होती है। भक्त गोविंद यादव ने बताया कि 25 सालों से वे यहां आ रहे है। यह एक सिद्ध पीठ है। मान्यता ऐसी है कि आप जो भी मनोकामना लेकर आएंगे वह पूरा हो जाता है। हनुमान जी की कृपा और ब्रह्मचारी महाराजों का तप है।

इन मंदिरों में भी आज होगा अन्नकूट
वीर बगीची मंदिर के अलावा इंदौर के दो बड़े मंदिरों में भी अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया है। इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में ही स्थिति रणजीत हनुमान मंदिर में भी अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया गया है। मंदिर के पुजारी पं.दीपेश व्यास ने बताया कि आवंला नवमी के मौके पर मंदिर में अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यहां पर करीब 35 हजार भक्तों के लिए भोजन प्रसादी बनाई जा रही है। मंदिर परिसर के पास बने ग्राउंड में भोजन प्रसादी तैयार करवाई जा रही है। इसी ग्राउंड में ही भक्तों के भोजन की व्यवस्था रहेगी। भगवान को भोग अर्पित कर अन्नकूट महोत्सव शुरू होगा। इसी प्रकार श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान छत्रीबाग में भी आंवला नवमी के मौके पर अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर के पंकज तोतला ने बताया कि अन्नकूट महोत्सव की पूरी व्यवस्थाओं के लिए अनंत श्री विभूषित श्रीमदजगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज ने श्री वेंकटेश मंदिर ट्रस्ट कमेटी के पदाधिकारियों व अन्य लोगों को मनोनीत किया है। यहां मंदिर परिसर में ही बने भोजन स्थल पर भोजन तैयार किया जाएगा। हालांकि यहां पास सिस्टम रखा गया है। पास के आधार पर ही यहां भक्तों को एंट्री दी जाएगी।

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