माननीयों को पेसा एक्ट का नाम पता, नियम नहीं: भास्कर ने 12 आदिवासी विधायकों से बात की, सिर्फ दो को जानकारी, सुझाव भी दिए

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भोपालएक घंटा पहले
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सरकार ने 19 सितंबर को नियमों का ड्राफ्ट जारी कर सभी प्रभावित पक्षों से दावे-आपत्ति और सुझाव मांगे थे। लेकिन ज्यादातर आदिवासी विधायकों को इसके बारे में पता ही नहीं है।
प्रदेश सरकार राज्य के आदिवासी इलाकों में 15 नवंबर बिरसा मुंडा की जयंती पर पेसा एक्ट 1996 को लागू करने जा रही है। इसके लिए मप्र पंचायत उपबंध (अधिसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम 2022 तैयार किए गए हैं। सरकार ने 19 सितंबर को नियमों का ड्राफ्ट जारी कर सभी प्रभावित पक्षों से दावे-आपत्ति और सुझाव मांगे थे। लेकिन ज्यादातर आदिवासी विधायकों को इसके बारे में पता ही नहीं है।
दैनिक भास्कर ने भाजपा और कांग्रेस के 12 विधायकों से पेसा एक्ट के नियमों पर चर्चा की, लेकिन सिर्फ दो विधायक ही इसके बारे में बता पाए। कुछ विधायकों ने तो इस मुद्दे पर बात ही नहीं की। हैरत की बात यह है कि राज्य के एक मंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके कांग्रेस के दिग्गज आदिवासी नेताओं को भी इस नियम के बारे में जानकारी नहीं हैं।
दैनिक भास्कर ने सभी विधायकों से ये तीन सवाल किए
- क्या आपने सरकार को पेसा एक्ट के संबंध में कोई सुझाव दिया है?
- क्या आपने सरकार को पेसा एक्ट के संबंध में कोई सुझाव दिया है?
- सरकार ने पेसा एक्ट में क्या-क्या प्रमुख प्रावधान रखे हैं?
कांग्रेस विधायकों के जवाब
पेसा एक्ट लागू करने की हमने सारी तैयारी कर ली थी, लेकिन हमारी सरकार गिरा दी गई। इतनी देरी के बाद सरकार सिर्फ चुनावी लाभ के लिए ऐसा कर रही है। इस पर विस में चर्चा करानी थी। -कांतिलाल भूरिया
1996 में कांग्रेस सरकार ने यह एक्ट बनाया था। 27 साल बाद इन्हें याद आई। आदिवासी संगठनों से इस पर चर्चा ही नहीं की। 15 नवंबर के बाद ही पता चलेगा, क्या नियम बनाए हैं। -ओमकार सिंह मरकाम
सरकार के नियम स्पष्ट नहीं हैं, जैसे पंचायत की सीमा कहां तक होगी। अधिसूचित इलाकों के बीच सामान्य वर्ग के गांवों का स्टेटस क्या होगा। वीरान गांव में क्या अधिकार होंगे। -हीरालाल अलावा
भाजपा विधायकों के जवाब
पेसा एक्ट में क्या प्रावधान रखे गए हैं, यह मुझे फिलहाल नहीं पता। पहले एक्ट लागू हो जाए, फिर मैं पता कर लूंगा कि इससे क्या-क्या फायदा होगा। -प्रेम सिंह पटेल, सामाजिक न्याय मंत्री
मुझे इसके बारे में नहीं पता। विधायकों से इस नियम के बारे में कोई चर्चा ही नहीं हुई, न ही कोई सुझाव मांगे गए। अब 15 तारीख के बाद ही पता चलेगा, इसमें क्या-क्या नियम बनाए गए हैं। – नंदिनी मरावी
मैंने सुझाव दिया है कि जघन्य अपराध में गिरफ्तारी से पहले पंचायत की अनुमति का प्रावधान नहीं होना चाहिए, वर्ना समस्या होगी। गांव से सटी वनोपज और खदानों पर पहला हक आदिवासियों का होगा। -राम दांगोरे
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