भोपाल आएंगे 3 बड़े इंस्टीट्यूट…: एम्स का पैरामेडिकल ट्रेनिंग संस्थान, नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी और एनसीडीसी का रीजनल सेंटर

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भोपाल16 मिनट पहले
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तीनों के लिए 35 एकड़ जमीन का किया इंतजाम।
राजधानी के आसपास आने वाले समय में कई बड़े सरकारी संस्थान आकार लेंगे। इसी के तहत कोलार के देहरीकलां में 10 एकड़ में एम्स का पब्लिक हेल्थ एवं पैरामेडिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बनाया जा रहा। यहां पर मरीजों के इलाज करने वाले पैरामेडिकल स्टॉफ को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा भी तीन बड़े संस्थानों को जमीन देने की प्रक्रिया या तो पूरी कर ली गई है या चल रही है।
इन संस्थाओं के आकार लेने से फॉरेंसिक साइंस, मेडिको लीगल, साइबर सिक्योरिटी, वायरस की जांच आसान हो सकेगी। अफसरों को दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही कम समय में सटीक रिपोर्ट मिल सकेगी।
जिला प्रशासन के अफसरों ने बताया कि भोपाल में तीन बड़े संस्थानों नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी, स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एवं पैरामेडिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट और एनसीडीसी सेंटर को जमीनें आवंटन करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसमें नेशनल फॉरेंसिक लैब को बरखेड़ा बोंदर में 15 एकड़ जमीन का आवंटन कर दिया गया था, लेकिन बाद में अतिरिक्त 12 एकड़ जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
प्रदेश का सबसे बड़ा संस्थान होगा देहरीकलां में, यहां ट्रेनिंग भी मिलेगी
कोलार क्षेत्र में देहरीकलां में एम्स की तरफ से इंटीग्रेटेड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ एवं पैरामेडिकल ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने की तैयारी है। 10 एकड़ जमीन में यह संस्थान बनाया जाएगा। इसे शुरू करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का आग्रह एम्स के कार्यपालक निदेशक डॉ. अजय सिंह ने सीएम शिवराज सिंह चौहान से किया था।
एम्स के इस सेंटर से उन मरीजों को फायदा होगा, जो पीएचसी और सीएचसी व उनसे भी निचले स्तर में इलाज कराते हैं। देहरीकलां में बन रहे संस्थान में पैरामेडिकल कोर्स संचालित होंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं, नई बीमारियों, रोगों के नियंत्रण वाले प्रोग्राम के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रदेश का सबसे बड़ा संस्थान होगा।
बगरोदा में देश का पहला एनसीडीसी का रीजनल सेंटर बनेगा
वायरस की पहचान कर हालात को कंट्रोल करने के लिए देश का पहला एनसीडीसी (नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल) का रीजनल सेंटर भोपाल में बनेगा। बगरोदा में 10 एकड़ जमीन पर 100 करोड़ की लागत से सेंटर का निर्माण किया जाएगा।
दरअसल, स्वाइन फ्लू, जीका, निपाह, कोरोना जैसे वायरस की जांच के लिए अभी सैंपल दिल्ली, पुणे भेजने पड़ते हैं। इस लैब के बनने से वायरस की जांच समय पर हो सकेगी और उसके रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे।
बरखेड़ा बोंदर…
फॉरेंसिक मामलों की जांच के लिए अन्य राज्यों पर नहीं रहना होगा निर्भर बरखेड़ा बोंदर में करीब 27 एकड़ जमीन पर देश की प्रसिद्ध नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी का निर्माण किया जाएगा। शासन द्वारा पूर्व में 15 एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए दी गई थी। 22 अगस्त को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के बाद 12 एकड़ अतिरिक्त जमीन के लिए फिर से प्रशासन ने प्रस्ताव भेजा है।
इसके बनने से मप्र को फॉरेंसिक मामलों की जांच के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रदेश में फॉरेंसिक के विशेषज्ञ होने से यहां गंभीर मामलों की जांच हो जाएगी। अभी फॉरेंसिक के मामलों में रिपोर्ट आने में देरी होती है, जिससे न्यायालयों में भी सरकार की ओर से पक्ष रखने में समय लगता है।
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