Chhattisgarh

बाँस की टोकरी से दीपावली के उपहार तक, स्थानीय हुनर को मिलेगा बाजार

  • सेवा संकल्प अभियान में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी, कलेक्टर ने कारीगरों और महिला समूहों को बाजार से जोड़ने का दिया भरोसा

कोरबा, 23 सितंबर 2026। सेवा संकल्प अभियान के तहत कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। प्रदर्शनी में जनजातीय परिवारों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार बाँस से निर्मित उपयोगी एवं सजावटी सामग्री, सूपा, टुकनी, टोकरी, कुम्हारों के खिलौने, कोसा वस्त्र तथा वनोपज से तैयार खाद्य सामग्री सहित विभिन्न पारंपरिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। स्थानीय उत्पादों की विविधता ने कोरबा की समृद्ध जनजातीय एवं पारंपरिक कला की झलक प्रस्तुत करने के साथ ही इन्हें बड़े बाजार से जोड़ने की संभावनाओं को भी सामने रखा।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्थानीय उत्पादों और उनसे जुड़े कारीगरों तथा महिला समूहों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में जिला प्रशासन प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य जनजातीय परिवारों, बिरहोर समाज, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराकर आजीविका के बेहतर अवसर तैयार करना है।

कलेक्टर ने आगामी दीपावली को ध्यान में रखते हुए स्व-सहायता समूहों और महिलाओं को बाँस से आकर्षक एवं उपयोगी उपहार सामग्री तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि दीपावली में उपहार देने की परंपरा को स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जा सकता है। बाँस से बनी आकर्षक टोकरियां, सजावटी सामग्री, उपयोगी वस्तुएं और अन्य उपहार सामग्री बाजार में उपलब्ध कराई जा सकती हैं। जिला प्रशासन ऐसे उत्पादों को प्रोत्साहित करने और बाजार उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा। इससे स्थानीय महिलाओं और कारीगरों को त्योहार के अवसर पर अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा तथा उनके पारंपरिक हुनर को नई पहचान मिलेगी।

कलेक्टर ने प्रदर्शनी में लगाए गए स्थानीय उत्पादों को जिला प्रशासन द्वारा क्रय किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं और कारीगरों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले और उनका पारंपरिक हुनर स्थायी आजीविका का माध्यम बने। उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प अभियान के तहत आगामी 7 अक्टूबर को भी स्थानीय उत्पादों से संबंधित प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिसके माध्यम से इन्हें अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने और बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह कंवर ने कहा कि बाँस से तैयार उत्पादों की अपनी अलग पहचान और मांग है। इन्हें तैयार करने वाले जनजातीय परिवारों, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय कलाकारों को उचित मूल्य तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में ऐसे आयोजन उपयोगी हैं। एमआईसी सदस्य एवं पार्षद नरेंद्र देवांगन ने कहा कि स्थानीय कारीगरों और जनजातीय समाज को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए उनके पारंपरिक उत्पादों को बाजार से जोड़ना जरूरी है। सूपा, टुकनी और टोकरी सहित बाँस से तैयार पारंपरिक वस्तुओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर बाजार तक पहुंचाने से इनकी मांग और उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधि गोपाल मोदी, सचिव एवं व्यवहार न्यायाधीश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण डिंपल भेड़िया, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, ट्राइफेड के संदीप शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

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