पुणे में आयोजित राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता में कोरबा की अर्शिका आर्या ने जीता द्वितीय पुरस्कार

कोरबा। शहर की प्रतिभावान बालिका अर्शिका आर्या ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए कोरबा और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। पुणे में आयोजित अखिल भारतीय सांस्कृतिक संघ के प्रतिष्ठित 22वें कल्चरल फोरम ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स में अर्शिका ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। यह आयोजन 21 मई से 31 मई तक आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करना अर्शिका की मेहनत, लगन और कला के प्रति समर्पण का परिणाम माना जा रहा है। प्रतियोगिता में विभिन्न सांस्कृतिक एवं कलात्मक विधाओं के प्रतिभागियों के बीच कड़ा मुकाबला रहा, लेकिन अर्शिका ने अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास के दम पर निर्णायकों को प्रभावित करते हुए दूसरा स्थान हासिल किया।
अर्शिका की इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे कोरबा में खुशी का माहौल है। उनकी माता कंचन यादव आर्या ने बताया कि अर्शिका बचपन से ही सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखती हैं और लगातार अभ्यास के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखारती रही हैं। परिवार ने हमेशा उसे आगे बढ़ने और अपनी कला को मंच देने के लिए प्रोत्साहित किया है।
अर्शिका के पिता अभिषेक जॉन बालको के जनसंपर्क विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी पुत्री की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल परिवार के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए उचित मार्गदर्शन और अवसर मिलना चाहिए, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।
प्रतियोगिता में पुरस्कार प्राप्त करने के बाद अर्शिका को आयोजकों द्वारा सम्मानित किया गया। उनकी इस सफलता पर शिक्षकों, मित्रों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अर्शिका की उपलब्धि जिले के अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
अर्शिका आर्या की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि छोटे शहरों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बनाने में सक्षम हैं। उनकी उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समर्पण, निरंतर अभ्यास और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।



