पिता हम्माल, मां की कलेक्टर से गुहार: ​​​​​​​खंडवा में 7 साल के कुलदीप की जन्म से टॉयलेट-पेशाब बंद, सर्जरी कराने पैसे की जरुरत

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सावन राजपूत। खंडवा15 मिनट पहले

मासूम बच्चों को लेकर कलेक्टर से गुहार लगाने पहुंची मां राजकन्याबाई।

मां.. मासूम बेटे की टॉयलेट और पेशाब को पेट के रास्ते से निकालकर फेंकती है। इलाज चल रहा है, सर्जरी भी संभव है लेकिन बार-बार मुंबई जाने के लिए पैसे की जरुरत है। गरीब मां ने कलेक्टर के सामने हाथ फैलाएं, मदद मांगी। कलेक्टर ने मंत्री जी से राशि दिलाने की बात कहीं। उधर, स्टूनो टू कलेक्टर का दिल पसीज गया और उन्होंने तहसीलदार ने 2 हजार रुपए दिलवाकर मदद करवाई।

दरअसल, 7 साल का कुलदीप नेचुरल रास्ते से पेशाब और टॉयलेट नहीं कर पाता है। मां-बाप ने जैसे-तैसे इंदौर के प्राइवेट हॉस्पिटल में सर्जरी कराकर पेट से टाॅयलेट-पेशाब का रास्ता निकाला। मुंबई के सरकारी अस्पताल में सर्जरी होना है। पिता जितेंद्र पटेल हम्माली करते है और मां राजकन्याबाई गृहिणी है। वे शहर के संजय नगर, दादाजी वार्ड में निवास करते है। दो बच्चे है, बड़ी 9 साल की बेटी रिंकी है। 7 साल का बेटा कुलदीप है, जिसकी शारीरिक हालात ठीक नहीं है।

मुंबई के सरकारी अस्पताल में सफल सर्जरी होगी

कुलदीप की मां राजकन्याबाई ने बताया कि, मासूम का इलाज लंबे समय से चल रहा है। जन्म के बाद से उसने आज तक ईश्वर के दिए अंगो से मल-मूत्र नहीं किया। इंदौर के प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया तो डेढ़ लाख रुपए लग गए लेकिन सफलता नहीं मिली। अब मुंबई के सरकारी केईएम अस्पताल में सर्जरी होना है।

एक सर्जरी हो गई है, दो ओर होना है। इलाज तो फ्री है लेकिन अन्य जरुरतें जैसे बार-बार मुंबई के लिए आने-जाने के लिए किराया लगता है। हर तरह की जरुरत होती है, एक बार में 15 से 20 हजार रुपए की जरुरत होती है। रिश्तेदारों से पहले ही कर्ज ले चुके है। घर की माली हालत ठीक नहीं है। इसलिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ता है। कलेक्टर से मिली तो उन्होंने मदद दिलाने के लिए मंत्रीजी से बात करने के लिए कहा है।

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