आउटसोर्स कर्मचारी भर्ती घोटाला: सीरीज- 13: 1374 कर्मचारियों में से जांच समिति को मिले 250 के दस्तावेज, इनमें से भी मंजूरी 158 की

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ग्वालियरएक घंटा पहले
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मेयर इन काउंसिल की बैठक में आज आउटसोर्स भर्ती घोटाले की जांच को लेकर हो सकती है चर्चा।
नगर निगम के आउटसोर्स भर्ती घोटाले की जांच करने वाली समिति को 1374 कर्मचारियों में से सिर्फ 250 कर्मचारियों के ही दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। समिति द्वारा किए गए परीक्षण में इनमें से सिर्फ 158 लोगों की ही मंजूरी आयुक्त द्वारा पाई गई है। शेष 31 कर्मचारियों के वर्कऑर्डर तो किए गए हैं, लेकिन इनमें आयुक्त की मंजूरी नहीं है। 61 कर्मचारियों को राज सिक्योरिटी फोर्स एजेंसी द्वारा अपने स्तर पर बदला गया है। साथ ही जांच का काम समाप्त होने की ओर है। जांच कर रहे कर्मचारी इसके लिए दोषी अधिकारी व कर्मचारियों के निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाए हैं।
आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में की गई गड़बड़ी को लेकर निगम के जिम्मेदार भले ही पल्ला झाड़ें, लेकिन अब कर्मचारी संघ ने भी इस मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति से कराने की मांग की है। कार्रवाई न होती देख जनप्रतिनिधि भी इस मामले की जांच सरकार एजेंसी से कराने की मांग कर रहे हैं।
मंगलवार को बाल भवन में दोपहर 3 बजे आयाेजित होने वाली मेयर-इन-काउंसिल की बैठक में भी इस पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक के लिए 7 सूत्रीय एजेंडा तैयार किया है। महापौर डॉ. शोभा सिकरवार भी इस मामले की मौजूदा जांच से संतुष्ट नहीं हैं।
जांच के घेरे में कार्यालय अधीक्षक, महापौर ने निगम परिषद में रखने से किया इनकार
इस मामले में सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी जांच के दायरे में हैं। ऐसे में कार्रवाई का दिखावा करते हुए निगमायुक्त किशोर कन्याल ने सामान्य प्रशासन विभाग के कार्यालय अधीक्षक प्रभाकर द्विवेदी का तबादला कार्यालय अधीक्षक परिषद के रूप में किया था।
उनके स्थान पर परिषद में कार्यालय अधीक्षक के प्रभार पर काम कर रहे भागचंद कुंदवानी को सामान्य प्रशासन विभाग का अधीक्षक बनाया था। महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने पत्र लिखकर जांच के दायरे में आ रहे प्रभाकर द्विवेदी को परिषद कार्यालय में न भेजने को कहा है।
जांच समिति में बदलाव की तैयारी
आउटसोर्स भर्ती घोटाले में दोषियों पर कार्रवाई न होने के साथ ही जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। तकनीकी पेच यह भी है कि यहां अपर आयुक्त स्तर के अधिकारियों की जांच उनके अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को सौंपी है।
निगमायुक्त ने जांच समिति में बदलाव की तैयारी कर ली है। सूत्रों के अनुसार जांच समिति में अपर आयुक्त वित्त रजनी शुक्ला, प्रभारी उपायुक्त अमरसत्य गुप्ता व सहायक विधि अधिकारी अनूप लिटौरिया को समिति में शामिल किया जाएगा।
आंदोलन की तैयारी में कर्मचारी संघ, दी सूचना
स्वयंसेवक अधिकारी कर्मचारी संघ नगर निगम ने आउटसोर्स भर्ती घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही ईपीएफ मामले में हुए घोटाले की जांच हो। संघ के कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र योगी व महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों को दोबारा से रखने और ठेका प्रथा को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा, सभी मांगों को 7 दिन में पूरा नहीं किया गया तो निगमायुक्त का पुतला दहन कर आंदोलन करेंगे।
आउटसोर्स भर्ती घोटाले की सरकारी एजेंसी से जांच कराने की मांग करेंगे
आउटसोर्स भर्ती घोटाले के रोजाना नए मामले सामने आ रहे हैं। इसके बाद भी न तो इसकी जांच ठीक से कराई जा रही है और न ही अब तक सामने आए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। जबकि भाजपा सरकार में स्पष्ट है कि घोटालेबाजों को बख्शा नहीं जाएगा। हम इस मामले को लेकर सीएम व प्रदेशाध्यक्ष को पत्र लिखकर मामले की जांच सरकारी जांच एजेंसी से कराने की मांग करेंगे।
-हरिपाल, नेता प्रतिपक्ष
आउटसोर्स भर्ती मामले की जांच समिति बदलने पर एमआईसी में चर्चा करेंगे। मैं चाहता हूं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। इसके लिए हर स्तर पर जांच कराई जा रही है, जिसके परिणाम जल्द ही आएंगे।
-किशोर कन्याल, आयुक्त, नगर निगम
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