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पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा का बुजुर्गों के नाम एक संगीतमय समर्पण

० बुजुर्गों के कल्याण के लिए पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा का सुरीला योगदान

मुंबई I तेजी से बदलते भारत में जहां युवा ऊर्जा और तकनीकी प्रगति की चर्चा होती है, वहीं एक सच्चाई यह भी है कि देश की वरिष्ठ नागरिक आबादी अभूतपूर्व गति से बढ़ रही है। आज भारत में लगभग 15.6 से 16 करोड़ लोग 60 वर्ष से अधिक आयु के हैं, और 2050 तक यह संख्या 34 करोड़ से भी अधिक होने का अनुमान है। दूसरी ओर, देश में करीब 18,000 संगठित वरिष्ठ नागरिक आवास सुविधाएँ हैं, जिनमें से कई आवश्यक संसाधनों और देखभाल के बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रही हैं। आने वाले वर्षों में लगभग 23 से 25 लाख सीनियर लिविंग यूनिट्स की मांग इस चुनौती को और गंभीर बना सकती है।


ऐसे समय में जब आंकड़े चिंता पैदा करते हैं, वहीं संवेदना और संकल्प आशा की किरण जगाते हैं। इसी दिशा में एक सराहनीय पहल की है डॉ. मुकेश बत्रा ने, जिन्होंने अपने बहुप्रतीक्षित वार्षिक गायन कार्यक्रम ‘यादों की बहार’ के 14वें संस्करण के माध्यम से बुजुर्गों के कल्याण को समर्पित एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया।

मुंबई के नरिमन पॉइंट स्थित वाई. बी. चव्हाण ऑडिटोरियम में आयोजित इस संगीतमय संध्या में 550 से अधिक संगीत प्रेमियों और परोपकारी नागरिकों ने शिरकत की। कार्यक्रम का उद्देश्य था ‘द शेफर्ड विडोज होम’ में रहने वाली वृद्ध विधवाओं की सहायता करना। भारत के स्वर्णिम युग के सदाबहार गीतों की प्रस्तुति ने न केवल पुरानी यादों को ताजा किया, बल्कि सेवा और संवेदना का संदेश भी दिया।

इस अवसर पर डॉ. बत्रा ने कहा कि हमारे बुजुर्ग केवल देखभाल नहीं, बल्कि साथ, गरिमा और अपनत्व के हकदार हैं। उनका मानना है कि समाज में करुणा की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए और हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे सकता है, चाहे वह समय हो, संसाधन हों या प्रतिभा।

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