नगर पालिका कार्यों में बाहरी हस्तक्षेप पर सख्ती, महिला जनप्रतिनिधियों के परिजनों को दूर रहने की चेतावनी

जांजगीर-चांपा। अकलतरा नगर पालिका परिषद से जुड़ा एक प्रशासनिक पत्र इन दिनों स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्र में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के कार्य संचालन, मर्यादा और नियमों के पालन को लेकर सख्त निर्देशों का उल्लेख किया गया है। यह पत्र नगर पालिका अकलतरा द्वारा जारी किया गया है, जिसमें शासन के पूर्व निर्देशों और विभिन्न संदर्भों का हवाला दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, शासन द्वारा नगरीय निकायों में महिला पदाधिकारियों को 33 प्रतिशत आरक्षण के तहत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित महिला पदाधिकारी स्वयं निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं और उनके स्थान पर किसी भी प्रकार से पति, रिश्तेदार या अन्य सहयोगियों का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। पत्र में कहा गया है कि कार्यालयीन कार्य, निरीक्षण, निर्णय प्रक्रिया अथवा कर्मचारियों को निर्देश देने जैसे विषयों में किसी भी बाहरी व्यक्ति की भूमिका नियम विरुद्ध मानी जाएगी।
नगर पालिका द्वारा जारी पत्र में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में कुछ अवसरों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के परिजनों द्वारा कार्यालयीन कार्यों में दखल देने, अधिकारियों-कर्मचारियों पर दबाव बनाने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणियां करने की शिकायतें सामने आई थीं। इन गतिविधियों से न केवल प्रशासनिक कार्य प्रभावित हुआ, बल्कि नगर पालिका की छवि को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है।
पत्र में यह भी इंगित किया गया है कि लगभग एक वर्ष पूर्व ऐसी ही स्थिति को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की गई थी, जिसकी जानकारी स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुई थी। इसके बावजूद यदि इस तरह की गतिविधियों की पुनरावृत्ति होती है, तो संबंधित प्रकरण में नगर पालिका अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित निर्वाचित पदाधिकारी की होगी।

नगर पालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र चेतावनी स्वरूप जारी किया गया है, ताकि भविष्य में नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जा सके और नगरीय प्रशासन सुचारू रूप से कार्य करता रहे।




