नई शिक्षा नीति 2020 से शिक्षा व्यवस्था में आएगा व्यापक बदलाव : डॉ. संजय गुप्ता

कोरबा/दीपका, 11 जनवरी। इंडस पब्लिक स्कूल दीपका के प्राचार्य डॉ. संजय गुप्ता ने नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 को भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के आदेशानुसार मौजूदा शैक्षणिक सत्र से प्रत्येक विद्यालय को नई शिक्षा नीति को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा और इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।
डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को समग्र, लचीला और छात्र-केंद्रित बनाना है, ताकि विद्यार्थी 21वीं सदी की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें। यह नीति रटने की बजाय समझ-आधारित शिक्षा, व्यावहारिक ज्ञान, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और कौशल विकास पर विशेष जोर देती है। उन्होंने कहा कि 34 वर्ष पुरानी 1986 की शिक्षा नीति के स्थान पर लाई गई यह नीति भारतीय मूल्यों में निहित रहते हुए शिक्षा को वैश्विक स्तर के अनुरूप बनाने का प्रयास है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत अब शिक्षा की शुरुआती कक्षाओं को नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी के नाम से नहीं, बल्कि ‘बालवाड़ी’ के रूप में जाना जाएगा। 5+3+3+4 की नई संरचना के माध्यम से बच्चों की उम्र और मानसिक विकास के अनुसार शिक्षा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर खेल-खेल में सीखने की पद्धति अपनाई जाएगी, ताकि बच्चों का बचपन उनसे छीना न जाए और पढ़ाई उन्हें बोझ नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम लगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति में मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। प्रत्येक राज्य में एक अनिवार्य मातृभाषा होगी, जिससे बच्चे अपनी संस्कृति, परंपरा, वेशभूषा, बोली और भाषा से जुड़ सकें तथा अपनी सांस्कृतिक अस्मिता को बनाए रख सकें। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे अपनी जड़ों से जुड़े रहेंगे।
डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि इस नीति के तहत शिक्षक और शिक्षिकाएं बच्चों के साथ बच्चे बनकर पढ़ाने का प्रयास करेंगे। उद्देश्य यह है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक सहज, रोचक और प्रभावी बने। शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का संतुलित समन्वय कर विद्यार्थियों को सर्वांगीण रूप से विकसित करना इस नीति का मुख्य लक्ष्य है।
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावहारिक, व्यावसायिक और जीवनोपयोगी कौशल प्रदान करना है। कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा को एकीकृत करने, प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग, बोर्ड परीक्षाओं के दबाव को कम करने और समझ-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देने जैसे प्रावधान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि नई शिक्षा नीति का अंतिम लक्ष्य एक ऐसे ज्ञान-आधारित समाज का निर्माण करना है, जहां छात्र न केवल शिक्षित हों, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल के बल पर निरंतर ऊंचाइयों को छूते हुए राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें। यह नीति शिक्षा को रोजगारपरक, आनंददायक और भविष्य के अनुरूप बनाकर भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करती है।




