धनतेरस पर माता का श्रृंगार: सोने-चांदी के सिक्कों और केसर आदि से किया अभिषेक, मंदिरों में भक्तों का ताता

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सीहोर29 मिनट पहले
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शहर के भोपाल नाका स्थित कार्य मंगलम में श्री शक्ति सेवा संस्थान के तत्वाधान में पांच दिवसीय स्फटिक श्री यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा, महालक्ष्मी अनुष्ठान और विशेष यज्ञ त्रिअनुष्ठान एक साथ हो रहे हैं। एक तरफ जहां वैदिक मंत्रों के बीच यज्ञ में आहुतियां छोड़ी जाती है तो दूसरी और श्रीयंत्र का सहस्त्रार्चन भी किया जा रहा है। हर दिन श्रद्धालुओं के द्वारा श्रीयंत्र का सहस्त्रार्चन अभिषेक किया। सहस्त्रार्चन के बाद आरती की। दूसरी ओर यज्ञ मंडप की भक्तों ने परिक्रमा की। शनिवार को आचार्य अनिल सोनी और यज्ञाचार्य पंडित पीयूष शर्मा के मार्ग दर्शन में बड़ी संख्या में वेद-पाठी ब्राह्मणों द्वारा सुबह श्री यंत्र पूजन के बाद केसर और सुगंधित द्रव से अभिषेक किया। वहीं 1000 से अधिक चांदी और सोने के सिक्के, गोमती चक्र और पीली कोडी से मां देवी लक्ष्मी की सहस्त्रार्चन की।
मौके पर यज्ञाचार्य पंडित शर्मा जी ने बताया कि शक्ति सेवा संस्थान के तत्वाधान में 5 दिवसीय स्फटिक श्री यंत्र प्राण-प्रतिष्ठा, महालक्ष्मी अनुष्ठान और विशेष यज्ञ आदि का आयोजन लगातार दूसरी साल भी जारी है। उक्त आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। यहां पर सुबह शनिवार को धनतेरस पर सहस्त्रार्चन का आयोजन किया था। उन्होंने कहा कि धनतेरस पर मां लक्ष्मी की पूजा करना जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं व शास्त्रानुसार समुद्र मंथन से जब प्रभु धनवंतरी प्रकट हुए थे। उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। माता लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से निकली हैं। धनतेरस को भगवान धनवंतरी की भी पूजा-अर्चना उपासना आराधना करने का अद्वितीय अविस्मरणीय व बेहद शुभ माना जाता है। इस कारण इस तिथि को धनवंतरी व धनतेरस, धन त्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। वहीं इस संबंध में जानकारी देते हुए देते हुए ज्योतिषाचार्य सोनी ने बताया कि रविवार को सुबह यंत्र पूजन के अलावा फलों के रस से अभिषेक किया जाएगा। उसके बाद 1 हजार मोती-मूंगा, लौंग, इलाइची से सहस्त्रार्चना की जाएगी।
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