गेहूं न मिलने से बढ़ी कालाबाजारी: बिचौलिए हुए सक्रिय, बाजार में 32 रुपए किलो पहुंचे दाम, गरीबों के पहुंच से दूर

[ad_1]

बालाघाट4 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

लंबे समय से जिले भर के करीब 650 सरकारी उचित मूल्य की दुकानों से हितग्राहियों को गेहूं का वितरण बंद कर दिया हैं। गेहूं नहीं मिलने के कारण लोगों के बीच सरकार के रवैये को लेकर आक्रोश पनप रहा है। कई बार माननीयों का ध्यान आकर्षित कराए जाने के बाद भी किसी प्रकार के सकारात्मक कदम नहीं उठाए जा सके हैं।

हैरानी की बात तो यह है कि जिले में गेहूं की किल्लत के चलते कालाबाजारी बढ़ने लगी हैं, फिर भी विभाग के अफसर लोगों की इस ज्वलंत समस्या को लेकर चुप्पी साधे खामोश बैठे हैं। स्थानीय बाजार में गेहूं के दाम 32 रुपए किलो की दर में विक्रय किए जा रहे हैं। आमसान छूते गेहूं के दाम से गरीबों का जीना मुहाल हो गया हैं और उनकी थाली से रोटी पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं।

गरीबों के साथ ये कैसा भेदभाव

सरकारी उचित मूल्यों की दुकान से हर महीने राशन लेने वाले हितग्राहियों का कहना रहा कि सरकार गरीबों के साथ मजाक कर रही हैं। धान और गेहूं उत्पादक बालाघाट जिले के हितग्राहियों को आखिर राशन दुकानों से गेहूं का वितरण क्यों नहीं किया जा रहा हैं। विभाग के अफसर भी इस मामले में जानकारी देने से बचते ही आ रहे हैं। सिर्फ एक ही जवाब होता है कि ऊपर से ही सप्लाई बंद हैं, तो आखिर कैसे हितग्राहियों को गेहूं का वितरण किया जा सकता हैं।

बढ़ गया आटे का भाव

इधर, गेहूं के संकट से जिले में आटे का भाव भी बढ़ गया हैं। पहले 5 किलो का आटा 150 रुपए में आता था, लेकिन इन दिनों यह 190 रुपए में बेचा जा रहा हैं। दिनों-दिन बढ़ती महंगाई का सबसे ज्यादा असर दैनिक मजदूर और प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा हैं। लोगों का कहना रहा कि राशन दुकानों से गेहूं नहीं मिलने से गांव-गांव में बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं।

खबरें और भी हैं…
[ad_2]
Source link

Related Articles

Back to top button