खनिज प्रशासन ने जिले के 42 खदानों का उत्खनिपट्टा निरस्त करने आदेश जारी किया

दुर्ग। कलेक्टर के अनुमोदन पश्चात उपसंचालक खनिज प्रशासन जिला दुर्ग ने जिले के 42 खदानों का उत्खनिपट्टा निरस्त करने आदेश जारी किया है। इन खदानों का खनिज नियमों के अनुसार संचालन नहीं किए जा रहे थे। इनमें कई खदानों में तो साल भर से ज्यादा समय से उत्पादन बंद था। जानकारी के मुताबिक, बहुत से अनेक पट्टेदारों गौण उत्खनिपट्टा स्वीकृत स्वीकृत किए गए है। जिला दुर्ग (छ.ग.) अंतर्गत स्वीकृत उत्खनिपट्टों के नस्तियों, खदानों का परीक्षण एवं निरीक्षण किया गया। इस दौरान बहुत से खदानों में उक्त स्वीकृत गौण खनिज उत्खनिपट्टा के नस्ती दस्तावेजों के अनुसार लगातार 12 माह से अधिक अवधि तक उत्पादन एवं प्रेषण का कार्य नही पाया गया। जिसके कारण छग गौण खनिज नियम 2015 के नियम 51 (6) के तहत उक्त उत्खनिपट्टा लेप्स की श्रेणी में आ गई है।
छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के नियम 51 (6) के अनुसार जहां पट्टा निष्पादन की तारीख से एक वर्ष की कालावधि के भीतर खनन संक्रियाएं प्रारंभ नहीं की गई हैं या ऐसी संक्रियाओं के ऐसे प्रारंभ करने के पश्चात् लगातार बारह माह की अवधि के लिए बंद कर दी जाती है वहां स्वीकृतिकर्ता प्राधिकारी आदेश द्वारा उत्खनन पट्टा निरस्त घोषित किए जा सकते हैं।जिसके तहत स्वीकृत उक्त गौण खनिज उत्खनिपट्टा को छग गौण खनिज नियम 2015 के नियम 51 (6) के तहत उत्खनिपट्टों को निरस्त घोषित किया गया है। ऐसे ही कई पट्टेदारों द्वारा मासिक पत्रक अप्राप्त होने से छ.ग. गौण खनिज नियम 2015 के नियम 51 (6) अंतर्गत उत्खनिपट्टा निरस्त करने आदेश जारी किया गया है।
निरस्त उत्खनिपट्टा में सर्वाधिक 27 चूना पत्थर के निरस्त किए गए। उत्खनिपट्टा में सर्वाधिक 27 चूना पत्थर के है। इसी प्रकार 1 डोलोमाइट, 2 क्वार्टाइज एवं 12 मिट्टी के हैं निरस्त किए गए ये खदान पतोरा, सेलूद, गुढ़ीयारी, चुनकट्टा, परसाही, अचानकपुर, ढौर, धौराभांठा, केसरा, सिकोला, मगरघटा, कुम्हारी, घुघसीडीह, कचांदूर, खुरसुल, चंगोरी, पेण्ड्रीतराई, कंदई, राजपुर, अकोला आदि ग्रामों में संचालित है।




