कोरबा: 5708 पद खाली, फिर भी 2474 संविदा लाइन अटेंडेंट का नियमितीकरण लंबित

कोरबा। राज्य बिजली वितरण कंपनी में लाइन अटेंडेंट के 5708 पद खाली होने के बावजूद 2474 संविदा कर्मियों का नियमितीकरण अब तक नहीं किया गया है। जबकि कंपनी द्वारा इस निर्णय से पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक भार का आंकलन किया जा चुका है और नियमितीकरण के संबंध में विधिक अभिमत भी प्राप्त कर लिया गया है। इसके बावजूद वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मियों की मांग अधूरी बनी हुई है।
प्रदेश के घरेलू सहित अन्य सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी राज्य बिजली वितरण कंपनी की है। कंपनी में वर्ष 2016 से संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों से नियमित कार्य लिया जा रहा है, लेकिन नई नियमित नियुक्तियां नहीं होने से नियमित कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। 31 जनवरी 2024 की स्थिति में कंपनी में कुल 8152 नियमित पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 2444 नियमित कर्मचारी ही कार्यरत हैं। इस प्रकार लाइन अटेंडेंट के विभिन्न ग्रेड के 5708 पद रिक्त पड़े हैं।
इन्हीं रिक्त पदों पर कार्यरत 2474 संविदा कर्मियों के नियमितीकरण की मांग बिजली कर्मचारी संगठनों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही है। संगठनों के अनुसार संविदा कर्मियों को 10 वर्षों की सेवा की शर्त पर रखा गया था और इनके नियमितीकरण पर लगभग 13 करोड़ रुपये वार्षिक अतिरिक्त आर्थिक भार का आंकलन भी किया जा चुका है। हाल ही में संविदा कर्मियों के हित में मानदेय वृद्धि तथा 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर आगे एक-एक वर्ष के लिए सेवा विस्तार का निर्णय लिया गया, लेकिन नियमितीकरण को लेकर उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।
बीएमएस के विद्युत प्रभारी राधेश्याम जायसवाल ने कहा कि संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ–महासंघ का प्रयास लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मियों के मानदेय में वृद्धि का निर्णय स्वागत योग्य है और संगठन को विश्वास है कि आने वाले समय में नियमितीकरण की मांग पूरी होगी। मानदेय वृद्धि के निर्णय के बाद बीएमएस से संबद्ध छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ–महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने कंपनी के चेयरमैन से मुलाकात कर पुरानी पेंशन बहाली और नियमित कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
प्रतिनिधिमंडल को चेयरमैन की ओर से बताया गया कि हर वर्ष संविदा कर्मियों के मानदेय निर्धारण के लिए एक कमेटी गठित की जाएगी, ताकि समय पर बढ़ोतरी का लाभ मिल सके। साथ ही भत्तों और भविष्य में नियमितीकरण से जुड़े विषयों पर रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात कही गई।
छत्तीसगढ़ विद्युत कर्मचारी संघ फेडरेशन-1 के महासचिव आर.सी. चेट्टी ने कहा कि संगठन के सुझाव पर बिजली कंपनी ने नियमितीकरण के संबंध में विधिक अभिमत प्राप्त कर लिया था, ऐसे में निर्णय लेने में कोई तकनीकी बाधा नहीं थी। लेकिन हालिया फैसलों से संविदा कर्मियों के नियमितीकरण पर एक तरह से विराम लग गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ औद्योगिक नियोजन स्थाई आदेश नियम लागू होने की स्थिति में संविदा कर्मी समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण के पात्र हैं, जबकि बिजली वितरण कंपनी में पहले से ही 5708 नियमित पद खाली हैं।










