कोरबा : 385 करोड़ की मल्टीविलेज जल योजना अधूरी, 245 गांवों के 3 लाख लोगों को पानी का इंतजार, फंड अटकने से 8 माह से काम सुस्त

कोरबा । आकांक्षी जिला कोरबा में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जलापूर्ति योजना की रफ्तार थम सी गई है। 385 करोड़ रुपये लागत वाली एतमानगर मल्टीविलेज जल प्रदाय योजना तय समयसीमा के बाद भी अधूरी है। फंड के अभाव और भुगतान अटकने के कारण कार्य कर रही एजेंसी ने लगभग 40 प्रतिशत काम लंबित छोड़ दिया है। सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में DI पाइप डंप पड़े हैं, वहीं तकनीकी गुणवत्ता और मानकों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाली जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत की गई थी, जिसका उद्देश्य हर घर नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध जल उपलब्ध कराना है। लेकिन जमीनी स्तर पर योजना की प्रगति अपेक्षा से काफी पीछे है।



कोरबा जिले के तीन ब्लॉक पोंडी उपरोड़ा, कटघोरा और पाली के 245 गांवों की लगभग 3 लाख आबादी को इस मल्टीविलेज स्कीम से जलापूर्ति की जानी है। अनुबंध के अनुसार योजना 27 फरवरी 2025 तक पूरी होनी थी, लेकिन समयसीमा लगभग समाप्त होने के बावजूद अभी भी करीब 40 प्रतिशत कार्य अधूरा है। विभागीय आकलन के अनुसार अब योजना को पूरा होने में कम से कम एक वर्ष और लग सकता है।
जानकारी के अनुसार परियोजना का क्रियान्वयन कर रही कंपनी Vindhya Telelinks Limited ने लगभग 60 प्रतिशत कार्य पूरा करने का दावा किया है, लेकिन उसे अब तक केवल 30 प्रतिशत भुगतान ही प्राप्त हुआ है। 385.90 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली योजना में लगभग 231 करोड़ रुपये के कार्य के विरुद्ध केवल करीब 116 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है, जबकि 115 करोड़ रुपये के बिल लंबित बताए जा रहे हैं। भुगतान रुके रहने के कारण कार्य की गति प्रभावित हुई है।

योजना के तहत 28.5 MLD क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जाना है और 8 एमबीआर (मास बैलेंस रिजर्वायर) का निर्माण भी प्रस्तावित है। लगभग 7.75 लाख मीटर OPVC और DI पाइपलाइन बिछाकर सभी 245 गांवों में जलापूर्ति की जानी है। लेकिन वर्तमान स्थिति में कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा है और बड़ी मात्रा में DI पाइप सड़कों के किनारे बेतरतीब ढंग से पड़े हैं, जिससे दुर्घटना, चोरी और क्षति का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि कई जगहों पर पाइप निर्धारित गहराई पर नहीं डाले गए हैं और निर्माण गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं दिख रही। एमबीआर निर्माण की गुणवत्ता जांच की भी आवश्यकता बताई जा रही है। पूर्व में इस प्रोजेक्ट को लेकर शिकायतें भी दर्ज कराई जा चुकी हैं, लेकिन ठोस सुधारात्मक कार्रवाई नजर नहीं आई।
जिले में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल 703 गांवों के लिए 1095 योजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें 458 गांव सिंगल विलेज स्कीम और 245 गांव मल्टीविलेज स्कीम में शामिल हैं। सिंगल विलेज स्कीम में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। विभाग अब तक केवल 107 गांवों में नियमित जलापूर्ति शुरू कर पाया है, जबकि 351 गांव अभी भी योजना पूर्ण होने का इंतजार कर रहे हैं। इस तरह सिंगल विलेज स्कीम के तहत केवल लगभग 23 प्रतिशत गांवों में ही जलापूर्ति शुरू हो सकी है।
पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव का कहना है कि फर्म का भुगतान पिछले 8 माह से रुका है, जिसके कारण कार्य प्रगति प्रभावित हुई है। फर्म को नोटिस जारी किया गया है। उनके अनुसार काम पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों की लागत वाली यह ड्रीम प्रोजेक्ट कहीं कागजों तक सीमित न रह जाए और जिन गांवों के लिए योजना बनी, वहां के लोगों को अब भी पानी के लिए इंतजार ही करना पड़े।




