Chhattisgarh

कोरबा में रेडी टू ईट समूह चयन पर बवाल, कमिश्नर के स्टे के बावजूद अपात्र समूहों से कराया जा रहा कार्य

कोरबा। आकांक्षी जिला कोरबा में सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण आहार 2.0 योजना के तहत रेडी टू ईट एवं फोर्टीफाइड आटा आपूर्ति के लिए महिला स्व सहायता समूहों के चयन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। संभागायुक्त कार्यालय बिलासपुर में प्रकरण विचाराधीन होने और यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद हरदीबाजार और कटघोरा परियोजना में अपात्र समूहों से कार्य प्रारंभ कराने के प्रयास किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

इस संबंध में जिया स्व सहायता समूह हरदीबाजार एवं संतोषी स्व सहायता समूह मलगांव ने एक बार फिर संभागायुक्त बिलासपुर को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपते हुए जिला प्रशासन एवं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

कमिश्नर के आदेश की अवहेलना का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा परियोजना हरदीबाजार में रेडी टू ईट निर्माण एवं वितरण के लिए जय मां दुर्गा स्व सहायता समूह बोईदा का चयन किया गया, जबकि इस चयन के विरुद्ध अपील प्रस्तुत की गई थी।
छत्तीसगढ़ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी निर्देश (दिनांक 24.03.2025) के अनुसार अपील का अधिकार होने के चलते मामला संभागायुक्त न्यायालय में लंबित है, जिस पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश भी जारी किया जा चुका है।

इसके बावजूद आरोप है कि जिला पंचायत सीईओ, तत्कालीन एवं वर्तमान जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और एक लिपिक द्वारा चयनित अपात्र समूहों को कार्य प्रारंभ कराने हेतु लगातार बैठकें, निरीक्षण और निर्देश दिए जा रहे हैं।

बैठकों, निरीक्षणों और नोटिस का सिलसिला

शिकायत पत्र में जून 2025 से दिसंबर 2025 तक की कई तिथियों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि—

जिला पंचायत और कलेक्टर कार्यालय में बैठकें आयोजित की गईं

समूहों से जुड़े ठेकेदारनुमा व्यक्तियों को बैठकों में शामिल किया गया

बैंक लोन दिलाने और मशीनें स्थापित कर कार्य प्रारंभ करने के आश्वासन दिए गए

स्टे के बावजूद यूनिट निरीक्षण कर काम चालू करने के निर्देश दिए गए

कार्य प्रारंभ नहीं करने पर कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन सभी कार्यवाहियों के माध्यम से न्यायालय के आदेश की अवहेलना करते हुए रेडी टू ईट उत्पादन शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है।

लिपिक पर दस्तावेज़ों में हेरफेर का आरोप

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिला महिला एवं बाल विकास कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 लिपिक द्वारा अपात्र समूहों के दस्तावेज़ बाद में जोड़कर द्वितीय सूची में उन्हें पात्र दर्शाया गया और प्रथम स्थान पर चयनित कराया गया।
इस संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी भी मांगी गई, लेकिन चयन प्रक्रिया लंबित होने का हवाला देकर जानकारी नहीं दी गई।

संभागायुक्त से तत्काल रोक लगाने की मांग

शिकायतकर्ता समूहों ने संभागायुक्त से मांग की है कि जब परियोजना हरदीबाजार और कटघोरा का मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तब तक वहां रेडी टू ईट निर्माण कार्य शुरू कराने पर तत्काल रोक लगाई जाए।

विभागीय पक्ष अभी शेष

इस पूरे मामले में फिलहाल महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
हालांकि, समूहों और विभाग के बीच चल रही खींचतान के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकांक्षी जिला कोरबा में रेडी टू ईट का उत्पादन एवं वितरण आखिर कब शुरू होगा, और सरकार की योजनाओं का लाभ ज़मीन पर कब उतरेगा।

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