कोरबा में धान खरीदी की बड़ी विडंबना: सवा सौ करोड़ से अधिक का धान जाम, पड़ोसी जिलों को प्राथमिकता से मिलिंग का डीओ जारी

कोरबा, 11 जनवरी। आकांक्षी जिला कोरबा में चालू खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत धान खरीदी अभियान गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार होता नजर आ रहा है। एक ओर जहां लगभग दो माह की अवधि बीत जाने के बाद भी जिले में निर्धारित लक्ष्य का करीब आधा ही धान खरीदा जा सका है, वहीं दूसरी ओर समर्थन मूल्य पर खरीदा गया सवा सौ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का साढ़े पांच लाख क्विंटल से ज्यादा धान उपार्जन केंद्रों में जाम पड़ा हुआ है। इसके बावजूद मार्कफेड द्वारा कोरिया, सरगुजा, बेमेतरा और जीपीएम जैसे पड़ोसी जिलों में खरीदे गए सवा आठ लाख क्विंटल से अधिक धान के कस्टम मिलिंग के लिए कोरबा के राइस मिलरों को ऑनलाइन डीओ जारी कर दिया गया है। इस स्थिति ने जिले की 41 सहकारी समितियों और 65 उपार्जन केंद्रों के कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है।

जिले को चालू विपणन वर्ष में 31 लाख 19 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए लगभग 52 हजार पंजीकृत किसानों के माध्यम से 41 सहकारी समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों से खरीदी की जानी है। लेकिन 10 जनवरी की स्थिति में केवल 27 हजार 216 किसान ही धान बेच सके हैं और कुल 16 लाख 45 हजार 565.60 क्विंटल धान की खरीदी हो पाई है, जिसकी कीमत समर्थन मूल्य 2300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 389 करोड़ 83 लाख 44 हजार 906 रुपये बैठती है। यानी लक्ष्य से जिला अभी लगभग 47 प्रतिशत पीछे है। शेष खरीदी अवधि में लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिदिन औसतन 1 लाख 13 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी करनी होगी, जो मौजूदा हालात में बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है। अभी भी 24 हजार से अधिक किसान ऐसे हैं जो अपना धान नहीं बेच पाए हैं।
खरीदे गए धान में से 10 जनवरी तक 120 से अधिक पंजीकृत राइस मिलरों द्वारा 10 लाख 89 हजार 336 क्विंटल धान का उठाव किया गया है, जो कुल खरीदी का 66.27 प्रतिशत है। इसके बावजूद उपार्जन केंद्रों में 5 लाख 54 हजार 816 क्विंटल धान अब भी पड़ा हुआ है, जिसकी कीमत 127 करोड़ 60 लाख 76 हजार 800 रुपये आंकी गई है। मार्कफेड भले ही यह दावा कर रही हो कि जिले में खरीदे गए धान के कस्टम मिलिंग के लिए शत-प्रतिशत डीओ जारी कर दिए गए हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि उठाव 70 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका है।
इसी बीच मुख्यालय स्तर से ऑनलाइन रिक्वेस्ट के आधार पर कोरबा के राइस मिलरों को पड़ोसी जिलों में खरीदे गए धान के कस्टम मिलिंग के लिए डीओ जारी कर दिए गए। जानकारी के अनुसार कुल 8 लाख 26 हजार 150 क्विंटल धान के लिए डीओ जारी हुआ है, जिसमें कोरिया जिले के लिए 3 लाख 49 हजार 940 क्विंटल, सरगुजा के लिए 2 लाख 57 हजार 210 क्विंटल, बेमेतरा जिले के लिए 1 लाख 19 हजार 260 क्विंटल और जीपीएम जिले के लिए 99 हजार 840 क्विंटल शामिल हैं। चूंकि इन जिलों की दूरी 130 से 200 किलोमीटर तक है, इसलिए दूरी के आधार पर अधिक परिवहन दर मिलने के कारण राइस मिलर इन जिलों के धान उठाव को प्राथमिकता दे रहे हैं। नतीजतन कोरबा जिले के उपार्जन केंद्रों में धान का उठाव धीमा पड़ गया है।
धान उठाव में देरी का सबसे ज्यादा असर उपार्जन केंद्रों पर दिख रहा है। जिले के 32 उपार्जन केंद्रों में बफर लिमिट 7200 क्विंटल से अधिक धान जाम हो चुका है। इनमें से 8 केंद्र ऐसे हैं जहां हालत बेहद गंभीर हैं और 14 हजार क्विंटल से अधिक धान जमा है। इन केंद्रों में हाथी प्रभावित बरपाली (कोरबा), सिरमिना, भैसमा, नवापारा, बेहरचुवां, अखरापाली, कोरबी (पोंडी उपरोड़ा) और बरपाली (बरपाली) शामिल हैं। हाथी प्रभावित बरपाली केंद्र में कर्मचारी जान जोखिम में डालकर धान की रखवाली कर रहे हैं। इसके अलावा 24 अन्य केंद्रों में 7200 से 13 हजार क्विंटल के बीच धान उठाव के इंतजार में है, जिनमें उतरदा, बोईदा, कनकी, करतला, केरवाद्वारी, कुल्हरिया, कोथारी, चैतमा, चिकनीपाली, लबेद, जटगा, जवाली, तुमान, निरधि, पसान, पोंडी, फरसवानी, बिंझरा, भिलाईबाजार, रामपुर, श्यांग, सुखरीकला और सोहागपुर शामिल हैं।
धान का समय पर उठाव नहीं होने से समितियों पर चौतरफा मार पड़ रही है। धूप और समय के कारण धान के वजन में सूखत से होने वाली कमी की भरपाई समितियों को करनी पड़ती है, जबकि शासन की ओर से 1 प्रतिशत तक शार्टेज का लाभ भी नहीं दिया जाता। किसानों से अतिरिक्त धान लेने का भी कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में यदि समय पर धान का उठाव नहीं हुआ और शार्टेज बढ़ा तो उसकी भरपाई समितियों को अपने कमीशन से करनी पड़ती है, अन्यथा वैधानिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष सरगुजा संभाग में एक समिति प्रबंधक आत्महत्या तक कर चुका है।
इस पूरे मामले में जिला विपणन अधिकारी ऋतुराज देवांगन का कहना है कि मुख्यालय स्तर से ऑनलाइन रिक्वेस्ट के आधार पर मिलरों की मिलिंग क्षमता के अनुपात में कोरिया, सरगुजा, बेमेतरा और जीपीएम जिलों के लिए डीओ जारी हुए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा जिले के मिलरों की कुल मिलिंग क्षमता 40 लाख क्विंटल से अधिक है, जबकि जिले में उपार्जन लगभग 30 लाख क्विंटल धान का है, इसलिए शेष क्षमता के लिए अन्य जिलों का डीओ जारी किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्टर को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है और अब जिले के धान उठाव को प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि, जमीनी हालात यह बता रहे हैं कि यदि जल्द ही कोरबा जिले के धान का उठाव तेज नहीं हुआ तो खरीदी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और इसका सीधा नुकसान किसानों के साथ-साथ समितियों और कर्मचारियों को उठाना पड़ेगा।




