Chhattisgarh

कोरबा: जरहाजेल के भू-विस्थापितों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, जमीन वापसी और पेड़ों की कटाई पर रोक की मांग

कोरबा,06 फरवरी 2026। कुसमुंडा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जरहाजेल के भू-विस्थापित ग्रामीणों ने एसईसीएल और जिला प्रशासन पर भूमि अधिग्रहण के प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने अधिग्रहित भूमि को मूल खातेदारों को वापस सौंपने तथा गांव में हो रही पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र एवं जिला प्रशासन द्वारा ग्राम जरहाजेल में अन्य गांवों के पुनर्वास के लिए बुलडोजर के माध्यम से पेड़ों की कटाई कराई जा रही है, जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल है। जबकि उक्त भूमि का अधिग्रहण वर्ष 1983 में पारित अवार्ड के तहत किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से 20 वर्ष पश्चात मूल खातेदारों को भूमि लौटाने की शर्त शामिल है। इसके बावजूद जबरन कार्रवाई कर किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है।

भू-विस्थापित दामोदर श्याम, इंद्र प्रकाश और घासीराम कैवर्त ने बताया कि उक्त भूमि का अधिग्रहण मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 247(1) के तहत किया गया था। तत्कालीन पश्चिमी कोयला प्रक्षेत्र (वर्तमान एसईसीएल) कुसमुंडा कोलरी के प्रबंधक द्वारा कोयला उत्खनन हेतु धारा 247(3) के अंतर्गत अनुमति मांगी गई थी। इस पर अतिरिक्त कलेक्टर, कोरबा द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 2/अ-67/82-83 में दिनांक 27 अप्रैल 1983 को पांच शर्तों के साथ भूमि पर दखल का अधिकार दिया गया था।

ग्रामीणों ने बताया कि आदेश में यह प्रावधान था कि उत्खनन के बाद 20 वर्ष पूर्ण होने तथा अधिकतम 60 वर्ष की अवधि के पश्चात उत्खनित क्षेत्र, आवासीय निर्माण, रेलवे लाइन, सड़क आदि के लिए ली गई भूमि भू-स्वामियों को वापस की जाएगी। साथ ही, विस्थापित परिवारों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने और शासन द्वारा निर्धारित भू-राजस्व का भुगतान किए जाने का भी उल्लेख है।

भू-विस्थापितों का आरोप है कि आदेश में अन्य गांवों के पुनर्वास का कोई प्रावधान नहीं था, इसके बावजूद ग्राम जरहाजेल में अन्य गांवों को बसाने का प्रयास किया जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि आज भी गांव के कई विस्थापित परिवार रोजगार और मुआवजे से वंचित हैं। भूमि अधिग्रहण के एवॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर दर्जनों लोगों को रोजगार से वंचित रखा गया है। यदि एवॉर्ड की जानकारी ही स्पष्ट नहीं है, तो एसईसीएल द्वारा भूमि का उपयोग कैसे किया गया, यह भी बड़ा प्रश्न है।

ग्रामीणों ने मांग की कि अधिग्रहित भूमि पर लगे पेड़ों की कटाई तत्काल रोकी जाए और जमीन मूल खातेदारों अथवा उनके परिवारजनों को सौंपने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो भू-विस्थापित उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान दीपक साहू, फीरत, हरिशरण, राकेश, लक्ष्मण, वीरेंद्र, सुमेंद्र, बृहस्पति, दीनानाथ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button