कैप्टिव माइनिंग की रफ्तार तेज, कोल इंडिया की मांग में गिरावट के संकेत

कोरबा, 04 अप्रैल 2026।
कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्पादन के नए आयाम छूते हुए 210.46 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्पादन दर्ज किया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 एमटी अधिक है। इसी अवधि में 204.42 एमटी कोयले का डिस्पैच भी किया गया, जो बीते वर्ष से 14 एमटी ज्यादा है।

कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग से लगातार बढ़ती आपूर्ति का असर अब कोल इंडिया की बिक्री पर साफ दिखाई देने लगा है। जानकारों का मानना है कि पहले कोल इंडिया पर निर्भर रहने वाले कई उपभोक्ता अब अपने खुद के कोल ब्लॉक विकसित कर चुके हैं, जिससे कंपनी की मांग में गिरावट आई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक कोल इंडिया के पास पीट हेड स्टॉक 130 एमटी तक पहुंच गया है। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि बाजार में कंपनी के कोयले की खपत पहले की तुलना में कम हुई है।
सहायक कंपनियों के प्रदर्शन की बात करें तो Northern Coalfields Limited को छोड़कर अन्य इकाइयां अपने निर्धारित उत्पादन लक्ष्य हासिल नहीं कर पाईं।
कोल क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग की लगातार बढ़ती हिस्सेदारी को देखते हुए कोल इंडिया को अपनी रणनीति में बदलाव करने की जरूरत है। सूत्रों के अनुसार, मांग में आई कमी को ध्यान में रखते हुए ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्पादन लक्ष्य घटाकर 769 एमटी तय किया गया है।




