कांधे पर डालकर ले गया भानजी का शव: जिला अस्पताल में नहीं मिली एम्बुलेंस

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छतरपुर7 मिनट पहले
छतरपुर में सिस्टम पर सवाल खड़े करने वाला वीडियो सामने आया है। जिला अस्पताल में 4 साल की मासूम की मौत हो गई। एम्बुलेंस नहीं मिली तो उसका मामा शव को कांधे पर रखकर ले गया।
छतरपुर जिला अस्पताल में शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली। बच्ची के बेबस मामा उसका शव कांधे पर लेकर पैदल चल पड़ा। काफी दूर चलने के बाद बस पकड़कर अपने गांव गया। मृतक का मामा बाजना के पाटन गांव का रहने वाला है। पाटन गांव जिला मुख्यालय से करीब 40 KM दूर है।
किशोरी अहिरवार ने बताया कि बुधवार सुबह 10 बजे मेरी भानजी प्रीति अपने 2 सहेलियों के साथ नदी किनारे खेल रही थी। मैं वहीं नहा रहा था। नदी के पास का एरिया गीला है, इस वजह से प्रीति मिट्टी में दब गई। उसकी सहेली कल्लो और पुच्ची ने रोना शुरू कर दिया। उनकी आवाज सुनकर मैंने देखा तो प्रीति मिट्टी में दबी हुई थी। मैंने किसी तरह उसे बाहर निकाला। तुरंत बिजावर अस्पताल ले गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे छतरपुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान यहां उसकी मौत हो गई।

2 घंटे तक भटकता रहा, लेकिन नहीं मिली एम्बलुेंस नहीं मिली
किशोरी का कहना है कि मैंने शव घर तक लाने के लिए एम्बुलेंस मांगी, लेकिन मुझे एम्बुलेंस नहीं मिली। 2 घंटे तक भटकता रहा। रात होने वाली थी, तो मैंने बच्ची को चादर से लपेटा और कांधे पर रखकर पैदल ही चल दिया। एक चौराहे से रिक्शा पकड़कर पुराना बिजावर नाका पहुंचा। यहां से बस से गांव आया। बता दें, स्थानीय विधायक ने पिछले दिनों शव वाहन दिया है। इसके बावजूद वह जरूरतमंद लोगों को नहीं मिल पाता।

पिता शराब पीने का आदी है
मृतक प्रीति का पिता रामेश्वर अहिरवार शराब पीने का आदी है, इसलिए डेढ़ साल पहले किशोरी अपनी भानजी को अपने गांव पाटन ले आया था। वह उसकी पढ़ाई-लिखाई और अच्छे भविष्य के सपने देख रहा था।
जिम्मेदारी से बच रहे हैं अधिकारी
इस मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. जीएल अहिरवार का कहना है कि विधायक द्वारा दिया गया शव वाहन समर्पण क्लब के पास है, इसलिए वे ही उसे संचालित करते हैं। उन्होंने बच्ची के शव को गांव तक पहुंचाने वाहन क्यों नहीं दिया, वे ही बता पाएंगे।
समर्पण क्लब के सचिव हरि अग्रवाल ने बताया कि हमारे पास बाजना क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति शव वाहन के लिए नहीं आया। यदि आता तो जरूर भिजवाते, क्योंकि छोटी बच्ची का मामला था। जबकि बुधवार को वाहन माध्यम से 3 शव पीड़ितों के घर तक भिजवाए गए हैं।
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डिक्की में ले गए नवजात का शव, कैरी बैग में रख कलेक्टर से मिलने पहुंचे

सिंगरौली जिला अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं मिली, तो पिता अपने नवजात बेटे का शव बाइक की डिक्की में रखकर ले गया। उनका गांव सिंगरौली मुख्यालय से 50km दूर है। इससे पहले दंपती ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिकायत की। कलेक्टर ने SDM को जांच के आदेश दिए हैं। दिनेश भारती बीजपुर के रहने वाले हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें…
MP में डेड बॉडी ले जाने को नहीं मिलते वाहन…
10 सितंबर 2022: अस्पताल में बच्चे की मौत, बाइक पर ले जाना पड़ा शव

पन्ना में शव ले जाने के लिए वाहन न मिलने का ताजा मामला पन्ना जिले का है। जहां सिमरिया थाना क्षेत्र के ग्राम राजपुर निवासी सौरभ चौधरी (5) पिता फुलारे चौधरी की डबल निमोनिया की वजह से तबीयत बिगड़ गई थी। उसे परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां शुक्रवार की दोपहर बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद परिजन ड्यूटी डॉक्टर और स्टाफ से शव वाहन की मांग करते रहे, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।
करीब एक घंटे इंतजार के बाद फुलारे अपने बच्चे के शव को कलेजे से लगाकर बाइक से 80 किमी दूर गांव राजपुर के लिए चल दिए। बता दें कि जिला अस्पताल के साथ ही नगर पालिका के पास भी शव वाहन उपलब्ध है। इसके बाद भी लोग परेशान होते हैं।
3 सितंबर 2022: नदी में डूबे युवक का शव बाइक पर ले जाना पड़ा

सीहोर और शाजापुर जिले के बीच निकली पार्वती नदी में नहाते समय हसीम (28) डूब गया। वह ग्राम चायनी थाना कालापीपल का रहने वाला था। इस दौरान उसके साथ नहा रहे अन्य बच्चे और युवकों ने शोर मचाया, जिसके बाद ग्रामीणों की भीड़ लग गई। सूचना पर शाजापुर जिले के कालापीपल और सीहोर से मंडी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों जिले की एनडीआरएफ की टीम पहुंची।
30 सदस्यीय दल ने रेस्क्यू कर शव को पानी से बाहर निकाला और परिजनों को सौंप दिया, लेकिन पीएम के लिए अस्पताल ले जाने के लिए कोई शव वाहन परिजनों को नहीं मिला। मजबूर होकर परिजन शव को बाइक पर ले गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
31 जुलाई 2022: पटिया खरीदकर मां के शव को बाइक पर बांधकर ले जाना पड़ा

शहडोल में अनूपपुर के गोडारू गांव की रहने वाली महिला जयमंत्री यादव को सीने में तकलीफ होने के कारण परिजनों ने जिला अस्पताल शहडोल में भर्ती कराया था। जहां जयमंत्री की हालत में सुधार न होने के कारण रात 11 बजे मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया। उपचार के दौरान रात 2.40 बजे उसकी मौत हो गई।
मृतका के बेटे सुंदर यादव ने जिला अस्पताल की नर्सों पर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में लापरवाही पूर्वक इलाज किया जा रहा था। जिससे स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा था। जब नर्स से मरीज को देखने की बात कही गई तो एक इंजेक्शन व एक बॉटल लगा दी गई।
अब स्लाइड्स से जानिए अस्पताल में कौन सी एम्बुलेंस रहती हैं…


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