जिला अस्पताल: प्रसव पीड़ा से भी अधिक दर्द दायक है सरकारी एंबुलेंस बुलवाने की प्रक्रिया

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देवास7 मिनट पहले

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प्राइवेट एंबुलेंस से महिला काे परिजन अपनी मर्जी से ले गए। - Dainik Bhaskar

प्राइवेट एंबुलेंस से महिला काे परिजन अपनी मर्जी से ले गए।

जिला अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर मंगलवार शाम 4.15 बजे डिलीवरी के लिए आई गर्भवती महिला की स्थिति बिगड़ने पर डाॅक्टर ने उसे इंदाैर एमटीएच कंपाउंड रेफर कर दिया। इसके बाद शुरू हुई 108 एंबुलेंस काे बुलाने की जटिल प्रक्रिया। महिला के परिजन ने 108 एंबुलेेंस के लिए अपने माेबाइल से फाेन लगाया, जाे सीधे भाेपाल लगा। वहां डिलीवरी वाली महिला की स्थिति बताने पर एंबुलेंस उपलब्ध करने की बात कही गई। अस्पताल परिसर में ही खड़ी 108 एंबुलेंस काे अाने में 15 मिनट लग गए। प्रसव पीड़िता देख परिजन ने निजी एंबुलेंस की व्यवस्था की और प्रसूता काे अस्पताल ले गए।

एंबुलेंस बुलवाने की यह पीड़ा प्रसव पीड़ा से भी अधिक है। यह महज एक उदाहरण है। ऐसे न जाने कितने मामलों में परिजन और मरीजों, प्रसूताओं को परेशानियों से जूझना पड़ता है। इस दर्द की वजह और सिस्टम की खामी को भास्कर ने ढूंढने की कोशिश की तो पता चला कि जिले में 108 एंबुलेंस 41 संचालित हाे रही हैं, जिसमें जननी सुरक्षा 22, एलएस (एडवांस लाइफ सपाेर्ट) वाली 3 व बीएलएस (बेसिक लाइव सपोर्ट एंबुलेंस) 16 एंबुलेंस हैं। तीनाें का संचालन अलग-अलग तरह के मरीजाें के लिए हाेता है। एलएस लग्जरी एंबुलेंस हैं, जिनकी लोकेशन दो जिला अस्पताल में और एक बीएनपी थाना परिसर में खड़ी रहती है।

पुरानी एंबुलेंस बंद हाेकर 1 मई से जिले में सभी नई चल रही हैं। जय अंबे कंपनी के मैनेजर आदित्य त्रिपाठी ने बताया वर्तमान में सभी 41 एंबुलेंस में चल रही हैं। इनमें से 5 में तकनीकी गड़बड़ी हुई है, उनके स्थान पर वैकल्पिक रूप में दूसरी गाड़ियां लगाई हैं। हमारे सभी एंबुलेंस समय पर पहुंचती, कभी लोकेशन दूर होने पर समय लग जाता है। एलएस एंबुलेंस में पायलट व एक मेडिकल स्टाफ रहता है। 108 एंबुलेंस में निर्धारित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर खड़ी रहती, पाइंट मिलने पर मौके पर पहुंचती हैं।

निजी एंबुलेंस से ले गए प्रसूता को
मंगलवार को समीप के ग्राम खतेड़िया में रहने वाली रचना परिवार के साथ डिलीवरी कराने आई थीं। अस्पताल में पहले से ही भर्ती थी, जिनकी स्थिति बिगड़ने पर देवास जिला अस्पताल से एमटीएम इंदौर के लिए रेफर कर दिया। एंबुलेंस आने पर परिजन ने पायलट से बोला हम प्राइवेट अस्पताल में ले जाएंगे तो पायलट ने ले जाने से इनकार कर दिया। 108 की सुविधा सिर्फ सरकारी अस्पतालाें में ले जाने की है। फिर परिजन पहले से अस्पताल परिसर में खड़ी निजी एंबुलेंस में महिला काे ले गए।

घायल शिक्षक तड़पता रहा, मैजिक से अस्पताल में लाए थे तब तक चली गई जान
27 अक्टूबर को शहर के राधागंज निवासी शिक्षक भास्कर सोनी इंदौर से देवास बाइक से आ रहे थे। उनके साथ पत्नी और छाेटा बेटा भी था। इसी दाैरान रसूलपुर चाैराहे के पास हादसा हाे गया। समय पर 108 एंबुलेंस व 100 डायल के नहीं पहुंचने पर माैजूद मनीष दांगी ने तड़पते साेनी और उनके परिवार काे मैजिक में बैठाकर जिला अस्पताल पहुंचाया तब तक उन्हाेंने दम ताेड़ दिया था। समय पर एंबुलेंस व 100 डायल हाेती ताे शायद उनकी जान बच जाती।

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