Chhattisgarh

एसईसीएल दीपका से बिना तिरपाल कोयला परिवहन पर उठे सवाल, पर्यावरण और सुरक्षा को खतरा

सुप्रीम कोर्ट के गाइड लाइन के अनुसार बिना तिरपाल के परिवहन नहीं कर सकते

कोरबा,दीपका,30 अगस्त 2025। दीपका खदान साइलो से प्रतिदिन 10 से 15 ट्रेनों के माध्यम से विभिन्न राज्यों में कोयले की ढुलाई की जा रही है। स्थानीय नागरिकों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि इस प्रक्रिया में पर्यावरणीय मानकों और सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाना आवश्यक है।

तस्वीरें और वीडियो में आप देख सकते हैं ढुलाई के दौरान यदि ट्रेनों में कोयले को तिरपाल से ढककर ले जाया जाए तो न केवल उड़ती धूल और प्रदूषण पर रोक लग सकती है, बल्कि रेल पटरियों पर कोयले के गिरने से होने वाली संभावित दुर्घटनाओं से भी बचाव संभव है।

सामाजिक संगठनों ने यह भी चिंता जताई है कि खुले में कोयला ले जाने के दौरान चोरी की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइनों के संपर्क में आने का खतरा भी मौजूद रहता है, जो जानमाल के लिए गंभीर हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पर्यावरणीय और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी।

स्थानीय नागरिकों एवं संगठनों ने प्रबंधन से अपील की है कि कोयले की ढुलाई में निर्धारित सुरक्षा और पर्यावरण मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए, अन्यथा वे इस मुद्दे को लेकर बड़े आंदोलन का रुख कर सकते हैं।

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