इमलीछापर चौक रेलवे ओवरब्रिज का काम ढाई साल से अटका, 2 लाख की आबादी परेशान

कोरबा। इमलीछापर चौक के पास प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण पिछले ढाई साल से ठप पड़ा है। निर्माण में बाधा बनने वाले 11 मकानों को प्रशासन ने छह माह पहले, बारिश के दौरान ही, खाली करवाकर ध्वस्त करा दिया था ताकि काम को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन जमीन खाली होने के बावजूद अब तक राइट्स का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचकर निर्माण शुरू नहीं कर पाया है।
राइट्स की सुस्ती और प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा कुसमुंडा के अलावा गेवरा-दीपका, भिलाई बाजार, हरदीबाजार, बांकीमोगरा सहित आसपास के 25 गांवों की करीब 2 लाख से अधिक आबादी को भुगतना पड़ रहा है। इमलीछापर फाटक पर औसतन हर दस मिनट में गेट बंद होता है, जिससे राहगीरों और वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई लोगों को मजबूरी में कुचैना होकर रेलवे अंडरब्रिज के रास्ते थाना चौक तक लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ओवरब्रिज का निर्माण अगली बारिश से पहले पूरा नहीं हुआ, तो यातायात की समस्या और भी गंभीर हो जाएगी। इस फाटक से गुजरकर ही लोग कुसमुंडा थाना, कुसमुंडा खदान और आसपास के अन्य क्षेत्रों तक पहुंचते हैं। वहीं कुसमुंडा खदान से शहर, चांपा, रायगढ़ और अन्य क्षेत्रों की ओर जाने वाले करीब 1 हजार मालवाहक ट्रक भी इसी मार्ग से गुजरते हैं। फाटक के पास स्थित गेवरा रोड स्टेशन से गेवरा–दीपका खदानों तक कोयला लदान के लिए 24 घंटे मालगाड़ियां चलती रहती हैं, जिसके कारण फाटक बार-बार बंद किया जाता है।
कुसमुंडा क्षेत्र के पूर्व पार्षद अमरजीत सिंह ने बताया कि “21-22 जून को प्रशासन ने भारी बारिश के बीच बिना अतिरिक्त समय दिए मकानों को तोड़कर लोगों को बेघर कर दिया। कहा गया था कि ओवरब्रिज का काम तुरंत शुरू होगा, लेकिन आज तक कोई प्रगति नहीं हुई।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस महीने काम शुरू नहीं किया गया तो क्षेत्रवासियों के साथ आंदोलन किया जाएगा।
पार्षद गीता गवेल ने भी कहा कि वर्षों से अटके इस निर्माण कार्य से लोग बेहद परेशान हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि गंभीरता दिखाते हुए रुके हुए निर्माण को जल्द से जल्द शुरू कराया जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके।










