Chhattisgarh

इमलीछापर चौक पर अधूरा ओवरब्रिज व फोरलेन बना मुसीबत, आज से अनिश्चितकालीन चक्काजाम

कोरबा, 24 मार्च 2026। जिले के कुसमुंडा क्षेत्र स्थित इमलीछापर चौक पर पिछले तीन वर्षों से ओवरब्रिज और फोरलेन सड़क निर्माण का काम अधूरा पड़ा है, जिससे क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार लगने वाले जाम और बदहाल सड़क की स्थिति से नाराज स्थानीय लोगों ने अब आंदोलन का रास्ता अपनाया है। पार्षद सहित व्यापारी एवं आमजन मंगलवार से यहां अनिश्चितकालीन चक्काजाम करेंगे।

एसईसीएल के सीएसआर फंड के सहयोग से प्रशासन द्वारा सर्वमंगला चौक से इमलीछापर चौक होते हुए कुचैना मोड़ तक फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन इमलीछापर चौक के पास यह कार्य लंबे समय से अटका हुआ है। वहीं, रेलवे फाटक से होने वाली परेशानी से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित ओवरब्रिज का निर्माण भी अधूरा है।

निर्माण कार्य ठप होने के कारण इमलीछापर चौक से कुचैना मोड़ तक पुरानी सड़क जर्जर हो चुकी है और दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। ओवरब्रिज अधूरा रहने से लोगों को रेलवे फाटक पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है या फिर वैकल्पिक मार्ग से लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे कुसमुंडा क्षेत्र के साथ-साथ गेवरा-दीपका, बांकीमोंगरा, हरदीबाजार और शहर की ओर आने-जाने वाले राहगीर भी प्रभावित हो रहे हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार मांग किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। विकास नगर वार्ड की पार्षद गीता गभेल के नेतृत्व में स्थानीय व्यापारी एवं आमजन इमलीछापर चौक पर चक्काजाम करेंगे। कुसमुंडा व्यापारी संघ के अध्यक्ष अशोक राठौर ने बताया कि हर बार प्रशासन आश्वासन देकर भूल जाता है, इसलिए इस बार काम शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

उल्लेखनीय है कि फोरलेन सड़क निर्माण के दौरान इमलीछापर रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से राहत दिलाने के उद्देश्य से एसईसीएल के सहयोग से ओवरब्रिज निर्माण शुरू किया गया था, जिसका कार्य राइट्स द्वारा किया जा रहा है। विकास नगर की ओर शिव मंदिर चौक से इमलीछापर चौक तक ओवरब्रिज का आंशिक निर्माण किया गया, लेकिन दूसरी ओर रेलवे फाटक से थाना चौक तक का कार्य अधूरा है।

बताया जाता है कि रेलवे फाटक के पास अतिक्रमण को बाधा बताते हुए करीब दो वर्ष पहले निर्माण कार्य रोक दिया गया था। लगभग नौ माह पूर्व प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमण हटाया और मकानों को तोड़ा, बावजूद इसके अब तक निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं किया गया है।

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