आवारा कुत्तों के हमले में चार वर्षीय चीतल की मौत, उपचार के दौरान तोड़ा दम

कोरबा। कोरबा वन मंडल के करतला रेंज अंतर्गत ग्राम पुरेना में आवारा कुत्तों के हमले से एक चार वर्षीय चीतल की मौत हो गई। गुरुवार सुबह तीन से चार आवारा कुत्तों ने चीतल का करीब तीन किलोमीटर तक पीछा किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वन विभाग द्वारा उपचार के लिए ले जाए जाने के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। वर्ष 2026 में वन्यजीव से जुड़ी यह पहली दुर्घटना बताई जा रही है।
ग्राम पंचायत पुरेना के सरपंच कृष्णा बिंझवार ने बताया कि मड़वारानी पहाड़ के नीचे स्थित तालाब और अन्य जल स्रोतों पर अक्सर हिरण एवं चीतल पानी पीने आते हैं। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे मंदिर की ओर से आए तीन-चार आवारा कुत्तों ने एक चीतल का पीछा करना शुरू कर दिया। कुत्ते उसे दौड़ाते हुए गांव के समीप तक ले आए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने चौकीदार बुधराम यादव को सूचना दी। ग्रामीणों ने मिलकर कुत्तों को खदेड़ दिया, लेकिन तब तक चीतल बुरी तरह घायल हो चुका था।
सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल चीतल को उपचार के लिए बरपाली स्थित सहायक पशु चिकित्सा अधिकारी के पास ले जाया गया। चिकित्सकों ने उसे बचाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों की उपस्थिति में चीतल का अंतिम संस्कार किया गया।
वन विभाग के एसडीओ एस.के. सोनी ने बताया कि वर्ष 2026 में वन्यजीव से जुड़ी यह पहली दुर्घटना है। उन्होंने कहा कि पूर्व में मड़वारानी क्षेत्र में आवारा कुत्तों के हमलों से प्रतिवर्ष पांच से छह चीतलों की मौत हो जाती थी। जंगल के भीतर जल स्रोत विकसित किए जाने के बाद वन्यजीवों का गांवों की ओर आना कम हुआ है, जिससे ऐसी घटनाओं में कमी आई है।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। वन विभाग ने लोगों से वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना तत्काल देने तथा उनकी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। विभाग द्वारा क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है।





