Chhattisgarh

आचार्य रामभद्राचार्य पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर बरसे देवजी भाई पटेल

कहा- सनातन विरोध कांग्रेस के डीएनए में, संत समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं

रायपुर, 29 मई। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक देवजी भाई पटेल ने आचार्य रामभद्राचार्य को लेकर कांग्रेस नेताओं द्वारा दिए गए कथित विवादित बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जैसे विश्वविख्यात संत पर की गई अमर्यादित टिप्पणी कांग्रेस के सनातन विरोधी चेहरे को उजागर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म और संत समाज के प्रति अनादर कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा रहा है।

देवजी भाई पटेल ने कहा कि आचार्य रामभद्राचार्य केवल एक संत नहीं, बल्कि हिंदू धर्म, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के प्रमुख ध्वजवाहकों में से एक हैं। उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक तथ्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे पूज्य संत के संबंध में की गई टिप्पणी न केवल अनुचित है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता अपने राजनीतिक हितों और पार्टी नेतृत्व को खुश करने के लिए सनातन धर्म के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। उनका आरोप था कि कांग्रेस नेता अक्सर हिंदू धर्म और उसके धर्मगुरुओं को निशाना बनाते हैं, जबकि अन्य धर्मों के विषय में ऐसी टिप्पणियां करने से बचते हैं। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

पूर्व विधायक ने आचार्य रामभद्राचार्य के सामाजिक एवं शैक्षणिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना कर हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य रामभद्राचार्य का जीवन समाज सेवा, राष्ट्र सेवा और धर्म प्रचार को समर्पित रहा है। कोरोना काल में भी उन्होंने जरूरतमंद लोगों तक भोजन और सहायता पहुंचाने का कार्य किया।

देवजी भाई पटेल ने कहा कि आचार्य रामभद्राचार्य को पद्म विभूषण सहित अनेक राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं और उनका सम्मान देश-दुनिया में किया जाता है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आग्रह किया कि वे किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से पहले उनके योगदान और व्यक्तित्व का अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा, संत समाज और आध्यात्मिक विरासत का सम्मान करना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है तथा सार्वजनिक जीवन में मर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाना चाहिए।

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