अनुज शर्मा के सोशल मिडिया ट्रोलिंग पर हाईकोर्ट का सख्त नोटिस

डिजिटल युग में व्यक्तिगत गरिमा और व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) की रक्षा की दिशा में एक बड़े कदम के तहत, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आज एक याचिका पर सुनवाई की, जिसमें प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी अभिनेता, विधायक (एमएलए) अनुज शर्मा के खिलाफ फैलाई जा रही मानहानिकारक, आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.सी. शर्मा पैरवी की।
24 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध इस मामले में उच्च न्यायालय में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच में याचिका क्रमांक: 3836/2026 पर इस दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए याचिका को औपचारिक रूप से स्वीकार किया। न्यायालय ने उन व्यक्तियों और संस्थाओं को नोटिस जारी किया जिन्होने अश्लील गाली गलौच, कैरिकेचर, एडिटेड वीडियो और मॉर्फ की गई तस्वीरें अपलोड करके श्री अनुज शर्मा के प्रतिष्ठा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन कर रहे थे, और जिनका निशाना केवल श्री शर्मा ही नहीं बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी थे। न्यायालय ने ऐसी समस्त आपत्तिजनक सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से तत्काल हटाने का आदेश दिया और श्री शर्मा की पहचान व विशेषताओं का अनधिकृत रूप से संपादन, मॉर्फिंग तथा दुरुपयोग करने वाले पक्षों से औपचारिक जवाब तलब किया।
कड़ी मेहनत से अर्जित प्रतिष्ठा को धूमिल करने का सुनियोजित अभियान
याचिका में डिजिटल चरित्र-हनन के बढ़ते खतरे की एक गंभीर तस्वीर पेश की गई है। न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई फर्जी हैंडल्स का इस्तेमाल कर पद्मश्री सम्मानित शर्मा के खिलाफ एक सुनियोजित बदनामी अभियान चलाया गया।
यह आपत्तिजनक सामग्री केवल राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने गंभीर व्यक्तिगत हमलों का रूप ले लिया। अपराधियों ने अश्लील कैरिकेचर, अपमानजनक टिप्पणियां, मॉर्फ की गई वीडियो, तथा अनुज शर्मा की पुरानी फिल्मों और गीतों के अनधिकृत अंश तैयार कर व्यापक रूप से प्रसारित किए। इन डिजिटल सामग्रियों में दुर्भावनापूर्ण ढंग से हेरफेर कर उनकी पहचान का मज़ाक उड़ाया गया और जनता को गुमराह किया गया, कला व सामाजिक क्षेत्र में दशकों की मेहनत से बनी उनकी छवि को जानबूझकर धूमिल करने की कोशिश की गई।
कानूनी तर्क: व्यक्तित्व अधिकार और सार्वजनिक गरिमा का समन्वय
उच्च न्यायालय के समक्ष यह मामला वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.सी. शर्मा ने जोरदार ढंग से रखा, जिनकी सहायता अधिवक्ता समीर रिगरी और अंजय मिश्रा ने की। कानूनी टीम में सहयोगी अधिवक्ताओं के रूप में निशांत श्रीवास्तव, विशाल चंद्रवंशी, ऐश्वर्य दीवान, सचिन निधि और मो. शाहिद रज़ा भी शामिल रहे।
वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.सी. शर्मा ने अपने तर्कों की नींव दो प्रमुख कानूनी सिद्धांतों — व्यक्तित्व अधिकार (प्रचार अधिकार) और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संवैधानिक प्रतिष्ठा के अधिकार — पर रखी। याचिकाकर्ता के वकील ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अनुज शर्मा केवल एक लोकप्रिय क्षेत्रीय नेता ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक व्यक्तित्व भी हैं, जिन्हें कला और संस्कृति में उनके असाधारण योगदान के लिए देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक — पद्मश्री — से सम्मानित किया गया है। वकील ने बताया कि फर्जी डिजिटल क्रिएटर्स और गुमनाम इंस्टाग्राम हैंडल्स ने जानबूझकर श्री शर्मा को उनकी प्रसिद्धि के कारण निशाना बनाया, ताकि उनकी पहचानी जा सकने वाली छवि, आवाज़ और व्यक्तित्व का दुरुपयोग कर क्लिक्स, व्यूज़ और दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक लाभ के लिए सनसनीखेज सामग्री तैयार की जा सके।
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में प्रस्तुत तर्कों ने इन न्यायिक मॉडलों का विस्तार करते हुए यह रेखांकित किया कि सहभागिता, मुद्रीकरण, या मानहानि के लिए किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत उपयोग सामान्य विधि (कॉमन लॉ) टॉर्ट्स और संवैधानिक गारंटियों का गंभीर उल्लंघन है।
न्यायालय का आदेश: तत्काल हटाना और सख्त जवाबदेही
डिजिटल नुकसान की गंभीरता को समझते हुए, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश जारी किया:
न्यायालय ने सोशल मीडिया मध्यस्थों और नामित प्रतिवादियों को श्री शर्मा एवं उनके परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक या मॉर्फ की गई सामग्री वाले सभी सूचीबद्ध लिंक, वीडियो, कैरिकेचर और पोस्ट को तुरंत हटाने और उन तक पहुंच अवरुद्ध करने का आदेश दिया।
अपराधियों को नोटिस: पहचाने गए खाताधारकों, चैनल प्रशासकों और सामग्री निर्माताओं को औपचारिक रूप से नोटिस भेजे गए जिन्होंने सामग्री संपादित कर पोस्ट की थी।
विस्तृत जवाब तलब: न्यायालय ने श्री शर्मा की पहचान को बिना सहमति के बदलने, मॉर्फ करने या व्यावसायिक उपयोग करने के आरोपी सभी पक्षों से विस्तृत जवाब मांगे हैं।
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनुज शर्मा ने कहा कि वे मेन स्ट्रीम, डिजिटल मीडिया तथा अपने क्षेत्र के मतदाताओं का सम्मान करते हैं, मगर उनकी आड़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के ऐसे कुत्सित दुरुपयोग अनुचित है, जिसमें उनके एवं उनके परिवार की निजता पर भी अभद्र और अमर्यादित अनर्गल प्रलाप किया जाता है और इससे व्यथित होकर ही नागरिक के तौर पर सविधान प्रदत्त मौलिक अधिकार की रक्षा हेतु यह मेरे लिए आवश्यक हो गया था, माननीय उच्च न्यायालय ने इसकी रक्षा कर मुझे सुरक्षा प्रदान की है। मीडिया और अपने क्षेत्र की जनता के प्रति मेरे मन में कोई दुर्भावना नहीं हैं, किंतु इसकी आड़ में स्वार्थ की रोटी सेंकने वालों और उनके कुंठित प्रयासों पर नियंत्रण आवश्यक है।
इस ऐतिहासिक फैसले पर विस्तृत जानकारी के लिए हाई कोर्ट के वकील श्री समीर रीगरी जी (+91 88785 14836) से बिलासपुर व श्री एन के श्रीवास्तव जी (+91 79992 84456) से रायपुर में संपर्क कर सकते हैं




