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अनिल शर्मा ने ‘इर्रेलेवेंट कहे जाने के बाद जवाब के रूप में नहीं बनाई थी ‘गदर’, बताया पूरा किस्सा

25 साल पूरे होने पर अनिल शर्मा ने ‘गदर’ को लेकर कही बड़ी बात, बताया दिलचस्प किस्सा

मुंबई। डायरेक्टर अनिल शर्मा को भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर फिल्ममेकर्स में से एक माना जाता है, जिन्होंने कई ऐसी यादगार फिल्में दी हैं जिन्होंने पीढ़ी-दर-पीढ़ी दर्शकों पर एक गहरी छाप छोड़ी है। उनके सबसे आइकॉनिक कामों में से एक है ‘गदर: एक प्रेम कथा’, जिसमें सनी देओल और अमीषा पटेल लीड रोल में थे। 25 साल पहले रिलीज हुई यह फिल्म एक ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी, जिसने बॉक्स ऑफिस के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और इसे कल्ट स्टेटस मिला था।


अब जब ‘गदर: एक प्रेम कथा’ अपनी 25वीं सालगिरह मना रही है, तो अनिल शर्मा ने फिल्म के इस शानदार सफर और इसे बनाने से पहले आई चुनौतियों को याद किया है। अपने करियर के एक मुश्किल दौर को याद करते हुए फिल्ममेकर ने खुलासा किया कि एक प्रोड्यूसर ने उन्हें “इररेलेवेंट (अप्रासंगिक) डायरेक्टर” कहकर अपना चेक वापस ले लिया था। इस बड़े झटके के बावजूद, अनिल शर्मा आगे बढ़े और ‘गदर’ का डायरेक्शन किया, जिसने बॉक्स ऑफिस का इतिहास ही बदल दिया और भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बन गई।

इस पर बात करते हुए अनिल शर्मा ने कहा कि उन्होंने कभी भी एक फिल्ममेकर के तौर पर खुद को प्रासंगिक (रेलेवेंट) साबित करने के लिए ‘गदर’ नहीं बनाई थी। “मैं आज तक किसी के सामने खुद को साबित नहीं करना चाहता, और उस समय भी नहीं करना चाहता था। जब कोई ऐसी बातें कहता है, तो मुझे हंसी आती है। मुझे इंडस्ट्री की बातों से कोई ठेस नहीं पहुंचती, मेरे लिए बस इतना मायने रखता है कि दर्शकों ने मेरी फिल्म देखी है और उसे पसंद किया है, इसके अलावा और कुछ नहीं।”

​भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के बैकड्रॉप पर बनी ‘गदर: एक प्रेम कथा’ ने रोमांस, देशभक्ति और दमदार इंसानी जज्बातों को बहुत ही खूबसूरती से पर्दे पर उतारा था। इस फिल्म ने दर्शकों के दिलों को गहराई से छुआ, कल्ट स्टेटस हासिल किया और अनिल शर्मा को भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन स्टोरीटेलर्स में से एक के रूप में स्थापित कर दिया। दो दशकों से भी ज्यादा समय के बाद, इसके सीक्वल ‘गदर 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर फिर से वही जादू बिखेरा और एक बड़ी ब्लॉकबस्टर बनकर उभरी। इसने यह साफ कर दिया कि इस पसंदीदा फ्रैंचाइज़ी की लोकप्रियता और इसकी विरासत आज भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के दिलों में बरकरार है।

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