हरतालिका तीज का त्यौहार: महिलाओं ने अखंड सुहाग के लिए रखा निर्जला व्रत, फुलेरा बनाकर किया शिव पार्वती की पूजन

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हरदा44 मिनट पहले
जिले में मंगलवार को हरतालिका तीज के अवसर पर महिलाओं ने अखंड सुहाग के लिए निर्जला व्रत रखा। पारंपरिक रूप से व्रत पूजन को लेकर महिलाओं ने साज श्रृंगार कर व्रत रखा और भगवान शिव व माता पार्वती का विधि विधान से पूजन किया। इस मौके पर पहली बार व्रत रख रही विवाहिताओं और कन्याओं में ज्यादा उत्साह नजर आया।
उपवास रखने वाली महिलाओं व युवतियों ने अपने अपने घरों में ही पूजा कर अपने जीवन साथी की लंबी उम्र की प्रार्थना की। मालूम हो कि सुहाग की रक्षा करने वाला यह व्रत विवाहित स्त्रियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। जिसमें महिलाएं बिना पानी के भूखी प्यासी रहकर अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। वहीं कुवांरी लड़कियां अच्छे जीवन साथी पाने की कामना को लेकर हरतालिका तीज का त्योहार मनाती हैं, जिससे उनको भी मां पार्वती की तरह ही उनका मनचाहा वर प्राप्त हो।
हरतालिका तीज पर महिलाओं ने मंगल गीत गाकर भगवान शिव और माता पार्वती की अराधना की। वहीं भगवान गणेश की पूजा की, जिससे उनका व्रत बिना किसी विघ्र-बाधा के पूरा हो जाए।
पंडित संजय शर्मा ने बताया कि भाद्र पद माह के शुक्ल पक्ष में जब चंद्रमा कन्या राशि और हस्त नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो इस दिन को हरितालिका तीज कहते हैं। इस व्रत का यह महत्व है कि अगर कुंवारी कन्या इस व्रत को विधि विधान से पूजन करती हैं, तो उसे सुयोग्य वर मिलता है। अगर सुहागिनें इस व्रत को करती हैं, तो उनके पति को लंबी उम्र की प्राप्ति होती है। माता पार्वती ने भगवान शंकर को पाने के लिए जंगल में जाकर घोर तपस्या की थी। इस पर भगवान भोलेनाथ ने वर दिया कि जो महिला इस व्रत को श्रद्धाभाव के साथ करेगी, उसका सुहाग दीर्घकाल तक जीवित रहेगा। इसी मान्यता को लेकर सभी महिलाएं पर्व पर निर्जला व्रत रहती हैं। महिलाओं ने नया परिधान धारण कर सोलह शृंगार कर घर व मंदिरों में शिव-पार्वती की पूजन-अर्चन करते हुए पति के दीर्घायु के लिए भोलेनाथ से आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर पर सुहागिन महिलाएं इकट्ठा होकर व्रत कथा का श्रवण भी किया।




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