Chhattisgarh

सीजी बोर्ड में घट रहे परीक्षार्थी, जिले में सीबीएसई स्कूलों की बढ़ती पकड़

कोरबा,13 फरवरी 2026। जिले में छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों, विशेषकर सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। इसके विपरीत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों की संख्या और उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अभिभावकों की रुचि अब सीजी बोर्ड के बजाय सीबीएसई पाठ्यक्रम की ओर अधिक बढ़ रही है। गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को लेकर अभिभावकों का झुकाव निजी एवं सीबीएसई स्कूलों की ओर देखा जा रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत लगभग 25 प्रतिशत छात्र शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश ले रहे हैं, जिससे भी सरकारी विद्यालयों की संख्या प्रभावित हुई है।

जिले में संचालित 55 सरकारी स्कूलों को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना के तहत उत्कृष्ट विद्यालय का दर्जा दिया गया है। इनमें से 15 विद्यालय अंग्रेजी माध्यम से संचालित हो रहे हैं। हालांकि, इनमें से 12 विद्यालय अब तक सीबीएसई से मान्यता प्राप्त नहीं कर सके हैं और वहां के छात्र फिलहाल सीजी बोर्ड की परीक्षाओं में ही सम्मिलित हो रहे हैं। माना जा रहा है कि जैसे ही इन विद्यालयों को सीबीएसई की संबद्धता मिल जाएगी, सीजी बोर्ड के परीक्षार्थियों की संख्या में और कमी आ सकती है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्र 2021-22 में जिले से सीजी बोर्ड परीक्षा में 27,138 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जो चालू सत्र 2025-26 में घटकर 22,287 रह गए हैं। इस प्रकार पांच वर्षों में 4,851 छात्रों की कमी दर्ज की गई है।

वहीं, पांच वर्ष पूर्व तक जिले में सीबीएसई से संबद्ध निजी स्कूलों की संख्या मात्र 24 थी। अब हर ब्लॉक में सीबीएसई से संबद्ध अंग्रेजी माध्यम स्कूल संचालित हो रहे हैं और इनकी संख्या बढ़कर 37 पहुंच गई है। सीबीएसई स्कूलों के परीक्षार्थियों की संख्या भी पांच वर्षों में 1,800 से बढ़कर इस सत्र में 4,088 हो गई है। हालांकि, इसमें तीन सरकारी आत्मानंद विद्यालय भी शामिल हैं, जो सीबीएसई पैटर्न पर संचालित हो रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति इसी प्रकार जारी रही तो आने वाले वर्षों में जिले में बोर्डवार विद्यार्थियों के अनुपात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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