सरकारी स्कूल से IAS तक पहुंची जयश्री जैन, अब सक्ती जिले की नई कलेक्टर; 2005 में डिप्टी कलेक्टर से शुरू हुआ प्रशासनिक सफर

जांजगीर-सक्ती। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में 18 अगस्त 2026 को हुए बड़े फेरबदल के तहत IAS अधिकारी जयश्री जैन को सक्ती जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। राज्य सरकार के इस प्रशासनिक बदलाव के बाद सक्ती की नई कलेक्टर के रूप में जयश्री जैन की नियुक्ति चर्चा में है। उनकी कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उनका सफर किसी बड़े महानगर के प्रतिष्ठित संस्थान से नहीं, बल्कि बिश्रामपुर के सरकारी स्कूल से शुरू हुआ और अब वह एक जिले की प्रशासनिक कमान तक पहुंच चुका है।
जयश्री जैन ने वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के माध्यम से अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत की थी। लंबे समय तक राज्य प्रशासनिक सेवा में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के बाद उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति मिली। जनवरी 2021 में उन्हें IAS में पदोन्नति मिली। अब करीब दो दशक से अधिक के प्रशासनिक अनुभव के बाद उन्हें सक्ती जिले के कलेक्टर की जिम्मेदारी मिली है।
बिश्रामपुर के सरकारी स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
जयश्री जैन की प्रारंभिक शिक्षा बिश्रामपुर के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने अंबिकापुर के होली क्रॉस कॉलेज से उच्च शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपनी मेधा का परिचय देते हुए B.Sc. में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया और गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
सरकारी स्कूल से शिक्षा लेकर उच्च शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन और फिर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश की उनकी यात्रा उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है, जो छोटे शहरों और सामान्य शैक्षणिक पृष्ठभूमि से निकलकर प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रशासनिक सेवाओं में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
वर्ष 2005 में शुरू हुआ प्रशासनिक सफर
जयश्री जैन ने वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के जरिए प्रशासनिक सेवा में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने जिला स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कोरिया और रायपुर में अनुविभागीय दंडाधिकारी यानी SDM के रूप में काम करने का अनुभव मिला।
इसके अलावा उन्होंने नजूल अधिकारी और उप जिला निर्वाचन अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी जिम्मेदारी संभाली। इन पदों पर काम करते हुए उन्हें राजस्व, कानून-व्यवस्था, निर्वाचन और आम लोगों से जुड़े प्रशासनिक मामलों को करीब से समझने का अवसर मिला।
जिला प्रशासन से मंत्रालय तक काम का अनुभव
जयश्री जैन का प्रशासनिक अनुभव केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में भी जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद राज्य शासन के मंत्रालय में भी विभिन्न पदों पर काम किया।
2021 में उन्हें बिलासपुर में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया था। इससे पहले वह मुख्य सचिव कार्यालय में उप सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इस तरह उनके प्रशासनिक अनुभव में जिला प्रशासन से लेकर राज्य मुख्यालय तक काम करने का व्यापक अनुभव शामिल रहा है।
2021 में मिली IAS पदोन्नति
राज्य प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के बाद जयश्री जैन को जनवरी 2021 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में पदोन्नति मिली। राज्य सेवा से IAS तक पहुंचने की यह उपलब्धि उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रही।
उनकी IAS पदोन्नति की खबर छत्तीसगढ़ के साथ राजस्थान के गंगाशहर में भी चर्चा का विषय बनी थी। पारिवारिक रूप से गंगाशहर से जुड़ाव होने के कारण वहां उन्हें गंगाशहर की बेटी और बहू के रूप में भी पहचान मिली। वहीं बिश्रामपुर से उनका जुड़ाव उनकी शिक्षा और शुरुआती जीवन से है।
ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में भी निभाई जिम्मेदारी
जयश्री जैन ने प्रशासन के अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। वर्ष 2025 के छत्तीसगढ़ सरकार के आधिकारिक जनसंपर्क रिकॉर्ड में उनका उल्लेख राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की प्रबंध संचालक के रूप में भी किया गया है।
ग्रामीण आजीविका, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों का अनुभव अब सक्ती जिले में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है। सक्ती में ग्रामीण आबादी बड़ी संख्या में निवास करती है, ऐसे में योजनाओं की जमीनी मॉनिटरिंग और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देना प्रशासन के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल रहेगा।
सक्ती जिले में नई कलेक्टर के सामने होंगी कई चुनौतियां
सक्ती जिले की कलेक्टर के रूप में जयश्री जैन के सामने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण, जनशिकायतों का समाधान, ग्रामीण क्षेत्रों तक सरकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी तथा सड़क और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करना प्रमुख मुद्दे हो सकते हैं।
इसके अलावा महिला एवं बाल विकास, ग्रामीण आजीविका, स्व-सहायता समूहों को मजबूत करना और शासन की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग भी जिला प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय रहेंगे। हालांकि, उनकी वास्तविक प्राथमिकताएं पदभार ग्रहण करने के बाद सामने आएंगी।
बिश्रामपुर से सक्ती तक का सफर बना प्रेरणा
जयश्री जैन की कहानी का सबसे खास पहलू यह है कि जिस प्रदेश में उन्होंने सरकारी स्कूल से अपनी शिक्षा शुरू की, उसी छत्तीसगढ़ में उन्होंने प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और अब उसी राज्य के एक जिले की कलेक्टर की जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं।
बिश्रामपुर की सरकारी स्कूल की छात्रा से लेकर राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी, फिर IAS और अब सक्ती की कलेक्टर बनने तक का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और निरंतर आगे बढ़ने की मिसाल है।
प्रशासनिक अनुभव की लंबी पृष्ठभूमि
करीब दो दशक से अधिक समय से प्रशासनिक सेवा में सक्रिय जयश्री जैन ने शासन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को करीब से देखा है। जिला प्रशासन, निर्वाचन, राजस्व, मंत्रालय और ग्रामीण आजीविका जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के कारण उनके पास प्रशासन की विभिन्न स्तरों पर कार्य करने का अनुभव है।
अब सक्ती जिले की जिम्मेदारी उनके प्रशासनिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। जिले की जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि उनके पूर्व प्रशासनिक अनुभव का लाभ सक्ती के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था में किस तरह दिखाई देता है।
एक नजर में जयश्री जैन
नाम: जयश्री जैन
सेवा: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)
कैडर: छत्तीसगढ़
बैच: 2016
IAS में आने का स्रोत: राज्य सिविल सेवा से पदोन्नति
राज्य प्रशासनिक सेवा: 2005 से
स्कूली शिक्षा: बिश्रामपुर
उच्च शिक्षा: होली क्रॉस कॉलेज, अंबिकापुर
प्रशासनिक अनुभव: जिला प्रशासन, निर्वाचन, मंत्रालय और विभिन्न विभाग
पूर्व जिम्मेदारियों में: SDM, नजूल अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी, अपर कलेक्टर बिलासपुर सहित विभिन्न पद
ग्रामीण आजीविका: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में जिम्मेदारी
नई जिम्मेदारी: कलेक्टर, सक्ती
पारिवारिक जुड़ाव: बिश्रामपुर, छत्तीसगढ़ और गंगाशहर, राजस्थान
सक्ती की नई कलेक्टर के रूप में जयश्री जैन की नियुक्ति उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकारी स्कूल से शुरू हुई शिक्षा से लेकर IAS और अब जिला कलेक्टर तक पहुंची उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि मेहनत, प्रतिभा और निरंतर प्रयास के दम पर छोटे शहरों से निकलकर भी बड़ी जिम्मेदारियां हासिल की जा सकती हैं।




