विप्लव दीपोत्सव: सेवा और संवेदना के 25 स्वर्णिम वर्ष,ग्राम नंदेली में 250 बच्चों के साथ मनेगी अनूठी दीपावली

जांजगीर-चांपा, 04 नवंबर। सामाजिक सरोकारों और सेवाभाव की मिसाल बन चुकी ‘विप्लव शिक्षण एवं कल्याण समिति’ इस वर्ष अपने सेवाकार्यों का रजत जयंती (25वां अनवरत वर्ष) मनाने जा रही है। संस्था द्वारा इस बार 5 नवंबर को पामगढ़ विकासखंड के ग्राम नंदेली स्थित स्कूल परिसर में लगभग 250 बच्चों के बीच दीपावली की खुशियां बांटी जाएंगी। इस विशेष आयोजन में बच्चों को मिठाई, पटाखे, दीये, बाती, किताब-कॉपी और पैक्ड फूड आइटम्स प्रदान किए जाएंगे।
वर्ष 1997 में संस्था की नींव रखे जाने के बाद से ही लगातार सामाजिक कार्य किए जा रहे हैं। बच्चों के साथ दिवाली मनाने की इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 2001 में छोटे पैमाने पर हुई थी, जिसे वर्ष 2003 से व्यवस्थित रूप से गांवों का चयन करके नियमित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। कोरोना संकट के कठिन दौर में भी संस्था ने इस सेवा क्रम को टूटने नहीं दिया। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करना और समाज में सेवा की भावना जागृत करना है। विभिन्न क्षेत्रों के लोग दे रहे हैं योगदान
डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, उद्योगपति, युवा, छात्र, व्यवसायी, इंजीनियर, नौकरीपेशा वर्ग और शिक्षक—समाज के हर वर्ग और उम्र के लोग पूरी तरह से सेवा भाव से इस अभियान से जुड़े हुए हैं। संस्था दीपावली के अतिरिक्त वर्षभर विभिन्न सेवाकार्यों में सक्रिय रहकर समाज सेवा की मिसाल पेश कर रही है।
देनदार कोऊ और है भेंज त सो दिन रेन
“देनदार कोई और है, भेजत सो दिन रेन” के भाव के साथ संस्था के छात्र और युवा अपनी पॉकेट मनी का एक हिस्सा तथा वेतन का अंश इस नेक कार्य के लिए समर्पित करते हैं। उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि आने वाली युवा पीढ़ी भी सेवा भाव से जुड़कर रक्तदान और पौधारोपण जैसे कार्य पूरी निष्ठा से कर रही है। भले ही संस्था का दायरा सीमित हो, लेकिन युवाओं की सोच अत्यंत सकारात्मक है।
डॉ अश्वनी राठौर संस्थापक सदस्य

मदद के लिए उठे हाथ, प्रार्थना के लिए जुड़े हाथ से बेहतर
जब इस अभियान की शुरुआत की गई थी, तब यह अनुमान नहीं था कि यह सफर इतनी दूर तक तय होगा। नेकी का कोना, पौधारोपण, लावारिश मृतकों का अंतिम संस्कार, कोविड काल में भोजन सेवा, तिरंगा अभियान, पीपीई किट वितरण और वेक्सीनेशन जैसे कार्यों के माध्यम से संस्था ने हमेशा सामाजिक सरोकारों को निभाया है।
विकास मिश्रा संस्थापक सदस्य

मेरे लिए ख़ुशी की बात है कि मेरे विद्यार्थियों में पहले यह सकारात्मक सोच आई । शुरुआत में कुछ ऐसी बातों का सामना भी किए जो हमे विचलित करती थी । लेकिन जो भी इससे जुड़ा अत्यंत पुनीत भाव से सहयोग करते रहे यह बात सबसे अधिक आत्मिक शांति देने वाली है कि यह सभी कार्य केवल सदस्यों के आंतरिक वित्तीय सहयोग से ही संचालित होते हैं।
दीपक कुमार यादव संस्थापक सदस्य





