राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज, विश्वविद्यालयों में बनेंगे NEP सेल

उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने दिए निर्देश, संभाग और जिला स्तर पर होंगी कार्यशालाएं; रोजगारपरक शिक्षा और अनिवार्य इंटर्नशिप पर जोर
रायपुर, 9 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों में नीति को सुचारू रूप से लागू करने, शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने तथा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से मंत्रालय में उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समीक्षा सह ट्रांसफॉर्म समिति की पहली महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रभाव केवल सरकारी निर्देशों और कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका लाभ शिक्षण संस्थानों और विद्यार्थियों को जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव अविनाश चंपावत, रीता यादव, प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति तथा समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। मंत्री वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री के विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसके लिए उद्योगों, औद्योगिक संस्थानों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से विद्यार्थियों को जोड़ने तथा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में पिछले दो वर्षों के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में सामने आई समस्याओं, क्रेडिट सिस्टम और विषय चयन को लेकर विद्यार्थियों तथा शिक्षकों के बीच व्याप्त भ्रम पर भी चर्चा की गई। इन समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालयों में प्रत्येक सेमेस्टर की शुरुआत में विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही संभाग और जिला स्तर पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों, नोडल अधिकारियों और विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडरों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नीति के क्रियान्वयन की निगरानी और विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक समर्पित नोडल अधिकारी और दो विद्यार्थी ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा प्रत्येक विश्वविद्यालय में NEP सेल गठित किया जाएगा। यह सेल विद्यार्थियों की विषय चयन, क्रेडिट सिस्टम और नीति से संबंधित अन्य शंकाओं के समाधान के साथ जागरूकता एवं समन्वय का कार्य करेगा।
विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जनरल इलेक्टिव (GE) विषयों के पाठ्यक्रम और प्रश्नपत्रों को अधिक सरल, व्यावहारिक तथा लचीला बनाने पर भी जोर दिया गया। मंत्री ने पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा, देश की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश दिए। छठे सेमेस्टर में अनिवार्य इंटर्नशिप की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए उद्योगों और व्यावसायिक संस्थानों के साथ समय रहते समन्वय स्थापित करने को कहा गया।
राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए अपर संचालक तथा कुलपतियों के समन्वय से विशेष निगरानी समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए। इसके साथ ही बीएड पाठ्यक्रमों के सुचारू संचालन और आगामी शैक्षणिक सत्र की तैयारियों की समीक्षा की गई। पात्र विश्वविद्यालयों तथा बी++ ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों से प्राप्त बीएड संचालन संबंधी आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई करने को कहा गया, ताकि समय पर पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकें और भविष्य में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
बैठक के अंत में मंत्री टंक राम वर्मा ने अधिकारियों और समिति के सदस्यों को सभी सुझावों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभागों, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को समन्वित प्रयास करने होंगे, ताकि छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन का देश में एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सके।




