राजधानी रायपुर के लिए ‘चाकूपुर’, ‘गुंडापुर’ जैसे अपमानजनक शब्दों के संबोधन से आहत थे सीएम साय, इसीलिए अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राजधानी में लागू की पुलिस कमिश्नरी !

रायपुर 26 जनवरी 2026 । राजधानी रायपुर अब सिर्फ छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि सख्त कानून-व्यवस्था और तेज कार्रवाई के नए मॉडल की ओर बढ़ चुका है। बढ़ते अपराध और बढ़ती शहरी चुनौतियों के बीच जिस मजबूत निर्णय की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही थी, वह अब जमीन पर उतर चुका है। विष्णुदेव साय सरकार ने रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू कर यह साफ संदेश दे दिया है कि राजधानी की पहचान अब किसी “अपराध-गढ़” चाकूपुर जैसी छवि से नहीं, बल्कि अनुशासन, सुरक्षा और कानून के भरोसे से बनेगी। गृह (पुलिस) विभाग की अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था 23 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गई है। यह कदम सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, संवेदनशीलता और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा सकता है।
सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि राजधानी में पुलिसिंग अधिक प्रभावी हो, निर्णय तेजी से हों और कार्रवाई मौके पर ही हो सके। फिलहाल यह पुलिस कमिश्नरी प्रणाली रायपुर नगर निगम सीमा के भीतर ही लागू होगी। नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 21 थाने अब सीधे पुलिस कमिश्नर के अधीन कार्य करेंगे। वहीं रायपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में एसपी व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। यानी शहर और ग्रामीण क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था को अलग-अलग प्रशासनिक ढांचे में संचालित किया जाएगा, जिससे दोनों क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार व्यवस्था बेहतर तरीके से काम कर सके। राजधानी की शहरी जरूरतों को देखते हुए यह विभाजन व्यावहारिक और प्रभावी माना जा रहा है।
डॉ. संजीव शुक्ला को रायपुर का प्रथम पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण पदों और जिम्मेदारियों में बदलाव हुए हैं। रायपुर कमिश्नरी को तीन प्रमुख जोनों-सेंट्रल, नॉर्थ और वेस्ट में विभाजित किया गया है ताकि पुलिस की निगरानी, संचालन और रिस्पॉन्स टाइम तेज किया जा सके।
दरअसल राजधानी रायपुर में बीते समय में नशे के बढ़ते नेटवर्क, हत्या, चाकूबाजी, मारपीट, चोरी-लूट जैसी घटनाओं ने कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाई थी। आम नागरिकों में यह भावना बनने लगी थी कि अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं और कई मामलों में निर्णयों की गति धीमी पड़ रही है। राजधानी को ‘चाकूपुर’, ‘गुंडापुर’ जैसे अपमानजनक शब्दों से जोड़ना केवल रायपुर की नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की छवि पर चोट थी। कुछ लोगों द्वारा प्रदेश को नशे की वजह से ‘उड़ता छत्तीसगढ़’ कहकर पुकारना भी राज्य के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली बात थी। इन्हीं परिस्थितियों को
गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा ने राजधानी में कठोर कानून और प्रभावी निर्णय लागू करने की इच्छा को प्राथमिकता में रखा और कमिश्नरी प्रणाली को रायपुर में लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया।
कमिश्नरी प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यही है कि कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसले अधिक तेज और प्रभावी ढंग से लिए जा सकते हैं। इस व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर को कई कार्यपालिक मजिस्ट्रेट जैसे अधिकार मिलते हैं। जिससे दंगे, जुलूस, विवाद, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित निर्णय संभव होता है। कई मामलों में जिला प्रशासन पर निर्भरता कम होगी और कार्रवाई की गति बढ़ेगी। इससे अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ कानून का भय भी बढ़ता है, जो किसी भी शहर में सुरक्षा स्थापित करने का सबसे मजबूत आधार माना जाता है।
नई व्यवस्था से राजधानी में पुलिसिंग का स्वरूप अधिक आधुनिक और परिणामोन्मुख होने की उम्मीद है। इसका सीधा असर यह होगा कि अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा शहर में कानून-व्यवस्था के मामलों में तुरंत कार्रवाई का संदेश जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजधानी की वास्तविक जरूरत को समझकर लिया गया फैसला है। रायपुर एक आधुनिक और तेजी से बढ़ता शहरी केंद्र है, जहां अपराध के स्वरूप भी बदल रहे हैं और कानून-व्यवस्था के लिए फुर्तीली प्रणाली आवश्यक होती है। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और रायपुर की पहचान अपराध के डर से नहीं, बल्कि कानून के भरोसे से बनेगी। यह उनकी संवेदनशीलता का भी प्रमाण है कि उन्होंने राजधानी के सम्मान और जनता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
राजधानी के लोगों के लिए यह निर्णय गणतंत्र दिवस से पहले एक बड़े उपहार की तरह देखा जा रहा है। क्योंकि किसी भी शहर में विकास, निवेश और सामाजिक शांति तभी संभव है जब नागरिक सुरक्षित महसूस करें। रायपुर में कमिश्नरी लागू होने के बाद उम्मीद है कि ट्रैफिक, अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में प्रशासनिक मजबूती और पुलिस की सक्रियता का असर जल्दी दिखाई देगा।
कुल मिलाकर, रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू कर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह साबित कर दिया है कि उनकी सरकार निर्णय लेने में मजबूत और सुशासन के प्रति गंभीर है। यह कदम राजधानी को अधिक सुरक्षित, सख्त और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है










