राखी के मायने बदल रहे, बहन की सुरक्षा से आगे उसके सपनों का साथ देने का संदेश

इंदौर। रक्षाबंधन का पर्व बदलते सामाजिक परिवेश के साथ अब नए मायने भी ग्रहण कर रहा है। पारंपरिक रूप से जहां यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम और भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता रहा है, वहीं बदलते दौर में राखी का संदेश बहन की शिक्षा, करियर, आत्मनिर्भरता और उसके सपनों को पूरा करने में सहयोग देने तक विस्तृत हो रहा है।
आज की बहन शिक्षा, व्यवसाय, रोजगार और नेतृत्व सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही है। ऐसे में उसके लिए केवल सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं, बल्कि परिवार और समाज से समान अवसर, विश्वास और प्रोत्साहन भी जरूरी है। रक्षाबंधन का बदलता स्वरूप इसी सोच को मजबूती दे रहा है और रिश्तों में समानता, सम्मान तथा सशक्तिकरण की भावना को बढ़ावा दे रहा है।
उज्जैन सिंह चौहान के अनुसार, रक्षाबंधन अब रिश्तों में सम्मान और समर्थन की नई परिभाषा गढ़ने का अवसर भी है। बहन के फैसलों का सम्मान करना, उसकी क्षमताओं पर विश्वास रखना और उसके सपनों को पूरा करने में सहयोग देना आज के समय में सच्ची रक्षा का स्वरूप माना जा सकता है।
डिजिटल दौर में मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी इस सकारात्मक सोच को व्यापक स्तर पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसी उद्देश्य से MPIS की ओर से इस रक्षाबंधन पर संदेश दिया गया है कि राखी केवल सुरक्षा का वादा नहीं, बल्कि बहन के सपनों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और उसे आगे बढ़ने का अवसर देने का संकल्प भी है।
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