Chhattisgarh

मानसून की बारिश से घटी बिजली की मांग, HTPP की 210 मेगावाट इकाई रखरखाव के लिए बंद

कोरबा, 3 जुलाई। मानसून की दस्तक के बाद पिछले तीन दिनों से शाम के समय हो रही बारिश का असर अब प्रदेश की बिजली खपत पर भी दिखाई देने लगा है। तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिलने के कारण घरेलू बिजली की मांग में करीब दो हजार मेगावाट की कमी दर्ज की गई है। मांग घटने के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी ने अपने ताप विद्युत संयंत्रों में लंबित रखरखाव कार्य शुरू कर दिया है। इसी क्रम में हसदेव ताप विद्युत गृह (एचटीपीपी) कोरबा पश्चिम की 210 मेगावाट क्षमता वाली नंबर-1 इकाई को एक सप्ताह के शॉर्ट शटडाउन पर लिया गया है।

प्रदेश की घरेलू बिजली जरूरतों की पूर्ति राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी द्वारा की जा रही है। कोरबा जिले स्थित एचटीपीपी और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (डीएसपीएम) ताप विद्युत संयंत्र से उत्पादित बिजली की आपूर्ति कोरबा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में की जा रही है।

इस वर्ष मानसून करीब 15 दिन की देरी से पहुंचा। इसके चलते जून के दूसरे पखवाड़े तक प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग छह हजार मेगावाट से अधिक बनी रही। बढ़ी हुई मांग के कारण संयंत्रों का निर्धारित रखरखाव स्थगित करना पड़ा था। अब लगातार हो रही बारिश के बाद मांग कम होने से उत्पादन कंपनी ने चरणबद्ध तरीके से इकाइयों का रखरखाव शुरू कर दिया है।

गुरुवार शाम करीब एक घंटे तक हुई बारिश के बाद प्रदेश में बिजली की मांग घटकर पांच हजार मेगावाट से भी नीचे पहुंच गई। एचटीपीपी की एक इकाई बंद रहने के बावजूद अतिरिक्त बिजली खरीदने की जरूरत नहीं पड़ी। केंद्रीय क्षेत्र से मिलने वाली निर्धारित बिजली और राज्य उत्पादन कंपनी के संयंत्रों से हो रहे उत्पादन के माध्यम से पूरी मांग की आपूर्ति की गई। आवश्यकता पड़ने पर 120 मेगावाट क्षमता वाले जल विद्युत संयंत्र से भी बिजली उत्पादन का विकल्प उपलब्ध है।

एचटीपीपी कोरबा पश्चिम के मुख्य अभियंता एच.के. सिंह ने बताया कि आवश्यक रखरखाव कार्य के लिए 210 मेगावाट क्षमता वाली नंबर-1 इकाई को एक सप्ताह के शॉर्ट शटडाउन पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मानसून देर से आने के कारण इस वर्ष रखरखाव कार्य भी विलंब से शुरू हुआ है। पहली इकाई के पुनः चालू होने के बाद अन्य इकाइयों का भी चरणबद्ध तरीके से रखरखाव किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक अनुमतियां प्राप्त की जा रही हैं।

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