बैतूल के कई गांवों में मांसाहार पर प्रतिबंध: पढ़िए, लंपी वायरस से बचने के लिए ग्रामीणों ने क्या-क्या किए उपाय, नियम तोड़ने पर फाइन भी वसूलेंगे

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बैतूलएक घंटा पहले

बैतूल में बढ़ते लंपी वायरस के मामलों के बीच वैक्सिनेशन ड्राइव तो चल रहा है, लेकिन ग्रामीण सिर्फ इसके भरोसे नहीं रहना चाहते। वायरस के फैलाव को लेकर अब कई गांवों में अलग-अलग तरह के प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। इन प्रतिबंधों को तोड़ने पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है। हाल ही में दिवाली मनाने पर रोक के बाद अब मांसाहार पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस नियम को तोड़ने वाले को 501 रु का जुर्माना भी देना होगा।

इसकी एक बानगी जिले के आरुल गांव में देखने मिली। जहां लंपी वायरस को दूर करने के लिए ग्रामीणों ने मिलकर एक फैसला लिया है। जिसके तहत गांव मे अगले 9 दिनों तक कोई भी मांसाहारी भोजन नहीं करेगा। अगर कोई इस नियम को तोड़ेगा तो उस पर 501 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही गांव की महिलाएं 9 दिनों तक लगातार गांव के देव स्थानों में जल चढ़ाकर लंपी वायरस दूर करने का अनुष्ठान भी करेंगी।

नवरात्र जैसा नजारा, जल चढ़ा रही महिलाएं

आम तौर पर नवरात्र के दौरान मंदिरों में जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की कतारें देखी जाती है। लेकिन बैतूल के आरुल गांव मे इन दिनों नवरात्र जैसा ही नजारा है। हाथ में जल लिए महिलाएं गांव के देव स्थानों पर जल चढ़ाने के लिए कतार लगाए नजर आ रही है। रोज यह अनुष्ठान मवेशियों को लंपी वायरस से बचाने के लिए किया जा रहा है। अगले 9 दिनों तक महिलाएं यहां माता मंदिर में पहुंचकर अलसुबह पूजा अर्चना कर रही है। आरुल, कुम्हारिया, माथनी, मंडई बुजुर्ग में यही अनुष्ठान हो रहे हैं।

छौंक लगाने पर भी रोक

गांवों में इन धार्मिक अनुष्ठान के अलावा भोजन तैयार करने में लगाए जाने वाले बघार को भी रोक दिया। ग्रामीण महिलाएं भोजन बनाते समय छौंक नहीं लगा रही हैं। प्रक्रिया एक सप्ताह से ज्यादा चलेगी। ग्रामीणों का विश्वास है की इससे उन्हे फायदा पहुंचता है। ग्रामीण अनिल सरले के मुताबिक इन धार्मिक प्रक्रियाओं को अपनाने का फायदा भी हुआ है। मवेशी तेजी से ठीक हो रहे है।

सैकड़ों मवेशियों की मौत

बैतूल में पिछले तीन महीने से लंपी पैर पसार रहा है। यहां 350 से ज्यादा गांव इसकी गिरफ्त में है। जिले में अब तक सैकड़ों मवेशियों की मौत हो चुकी है। वहीं लगभग हर गाँव मे लंपी वायरस से पीड़ित मवेशी हैं। जिससे ग्रामीणों में खौफ है। पशु चिकित्सा विभाग लंपी की रोकथाम में सुस्त नजर आ रहा है। जिससे अब ग्रामीण भगवान और तंत्र मंत्र का सहारा ले रहे हैं। नारायण परते बताते है की पशु चिकित्सा विभाग का जैसा सहयोग और उपचार मिलना चाहिए वैसा नही मिल रहा। इसीलिए धार्मिक अनुष्ठान की ओर रुख कर रहे हैं।

मांसाहार पर पूरी तरह रोक

गांव में नियम बनाया है। जिसके तहत वायरस का प्रकोप हटने तक अगर कोई भी ग्रामीण मांसाहार का सेवन करेगा तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। फिलहाल इसकी अवधि 9 दिन है। इस दौरान मांसाहार वर्जित है। उल्लंघन करने पर 501 रु का जुर्माना लगाया जाएगा। एक श्राद्ध आयोजन के दौरान ग्रामीणों ने एकत्रित होकर यह फैसला किया है।

पशु चिकित्सा विभाग और प्रशासन ग्रामीणों को ये बात समझाने में नाकाम दिख रहा है कि जब कोरोना जैसी महामारी वैक्सिनेशन से ही काबू में आई तो फिर वायरस को रोकने के लिए भी केवल और केवल वैज्ञानिक तरीके ही कारगर साबित होंगे। कहीं ना कहीं ये प्रशासनिक सुस्ती का ही नतीजा है जो लोग अब अंधविश्वास की शरण में जा रहे हैं।

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