बदलते बस्तर का संदेश लेकर 164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली रवाना, राष्ट्रपति से करेगा मुलाकात

रायपुर, 28 जुलाई। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सामाजिक परंपराओं और बदलते बस्तर की नई पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से बस्तर का 164 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दिल्ली के लिए रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर उन्हें बस्तर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था से अवगत कराएगा।
प्रतिनिधिमंडल में परगना मांझी, चालाकी, समाज प्रमुख, बस्तर पंडुम-2026 के जनजातीय युवा कलाकार, समाज प्रतिनिधि तथा बस्तर के पद्मश्री सम्मान प्राप्त विभूतियां शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति के समक्ष यह संदेश भी रखेगा कि आज का बस्तर हिंसा और भय की छवि से निकलकर शांति, विकास और विश्वास के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को बताएगा कि शासन की विकासोन्मुखी योजनाओं तथा सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शिक्षा, पर्यटन, रोजगार और जनजीवन को नई गति मिली है। साथ ही, बस्तर के युवा अपनी प्रतिभा और सांस्कृतिक विरासत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति के प्रति बस्तरवासियों की ओर से आभार व्यक्त करते हुए यह संदेश भी देगा कि अब बस्तर की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि शांति, विकास, लोकतांत्रिक भागीदारी और नई उम्मीदों के प्रतीक के रूप में भी स्थापित हो रही है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दिल्ली रवाना हो रहे प्रतिनिधिमंडल को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दल केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत का प्रतिनिधित्व करेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन तक बस्तर की लोकसंस्कृति और सामाजिक मूल्यों की गूंज पहुंचना पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने कहा कि कभी नक्सलवाद की छाया से पहचाना जाने वाला बस्तर आज शांति, शिक्षा, पर्यटन, खेल और सांस्कृतिक चेतना की नई पहचान बना रहा है। यह यात्रा पूरे देश के सामने बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर प्रस्तुत करेगी और यह संदेश देगी कि बस्तर अब भय का नहीं, बल्कि विश्वास, विकास, संस्कृति और नए अवसरों का प्रतीक बन चुका है।




