Chhattisgarh

पेंड्रा में साइकिल वितरण योजना पर उठे सवाल, छात्राओं को मिली खराब और टूटी-फूटी साइकिलें; नगर पालिका अध्यक्ष ने किया निरीक्षण

पेंड्रा। विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पेंड्रा में सवाल खड़े हो गए हैं। पेंड्रा के पीएम श्री स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय में कक्षा 9वीं की छात्राओं को वितरित की गई साइकिलों में कई खामियां सामने आई हैं। छात्राओं को मिली कुछ साइकिलें खराब और टूटी-फूटी हालत में पाए जाने के बाद साइकिल वितरण की गुणवत्ता को लेकर मामला चर्चा में आ गया है।

जानकारी सामने आने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान विद्यालय पहुंचे और छात्राओं को वितरित की गई साइकिलों का मौके पर निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई साइकिलों की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। कुछ साइकिलों में टूट-फूट और अन्य तकनीकी खामियां पाए जाने पर उन्होंने नाराजगी जताई और इसे गुणवत्ता के लिहाज से गंभीर मामला बताया।

नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान ने कहा कि सरकार की ओर से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देने के उद्देश्य से साइकिलें उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में यदि छात्राओं को ही खराब या क्षतिग्रस्त साइकिलें मिलेंगी तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए ऐसी साइकिलों का वितरण नहीं किया जाना चाहिए था।

साइकिलों में खामियां सामने आने के बाद सरकारी योजनाओं के तहत सामग्री की गुणवत्ता जांच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि छात्राओं को साइकिल वितरित करने से पहले उनकी गुणवत्ता और तकनीकी स्थिति की जांच किस स्तर पर की गई। यदि जांच की गई थी तो खराब साइकिलें वितरण प्रक्रिया तक कैसे पहुंचीं। साथ ही इस मामले में जिम्मेदारी किस अधिकारी या संबंधित एजेंसी की है, इसकी भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।

नगर पालिका अध्यक्ष ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी राशि खर्च कर छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। साइकिलों की गुणवत्ता की जांच के साथ यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि खराब साइकिलों की आपूर्ति और वितरण के लिए जिम्मेदार कौन है।

छात्राओं की परेशानी को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान ने प्रशासनिक प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय अपने निजी खर्च पर खराब साइकिलों की मरम्मत कराने का आश्वासन भी दिया है। उनके इस कदम से छात्राओं को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस पूरे मामले ने सरकारी स्तर पर होने वाली गुणवत्ता जांच और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

साइकिल वितरण योजना का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देना और उनके सुरक्षित आवागमन को आसान बनाना है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं के लिए साइकिल जैसी सुविधा शिक्षा से जुड़ाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में यदि योजना के तहत वितरित की जाने वाली साइकिलें ही खराब स्थिति में हों, तो इसका सीधा असर छात्राओं की सुविधा और सुरक्षा पर पड़ सकता है।

अब पूरे मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। देखना होगा कि खराब साइकिलों की मरम्मत कराकर मामले को समाप्त किया जाता है या फिर साइकिलों की गुणवत्ता में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों की भी जांच कर कार्रवाई की जाती है। छात्राओं और उनके अभिभावकों की नजर भी इस बात पर है कि भविष्य में वितरित होने वाली साइकिलों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।

Related Articles

Back to top button