Chhattisgarh

दीपावली पर मिट्टी के दीये जलाने और स्थानीय बाजार से खरीदारी करने का संदेश, वेल विशर फाउंडेशन ने चलाया जागरूकता अभियान

जांजगीर चांपा। दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीयों के उपयोग और स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वेल विशर फाउंडेशन ने शासकीय प्राथमिक शाला कोटगढ़ में जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान स्कूली बच्चों के लिए भाषण और मिट्टी के दीये बनाने की प्रतियोगिता आयोजित की गई। बच्चों को भारतीय संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय बाजार के महत्व की जानकारी देते हुए स्वदेशी उत्पादों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में वेल विशर फाउंडेशन के सचिव चिराग शर्मा ने बताया कि संस्था पिछले पांच वर्षों से लगातार दीपावली पर मिट्टी के दीयों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि मिट्टी के दीये खरीदने से कुम्हारों की मेहनत को सम्मान मिलने के साथ उनकी आजीविका को भी सहारा मिलता है। उन्होंने लोगों से ऑनलाइन खरीदारी के बजाय स्थानीय बाजार और छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता देने की अपील की।

संस्था के सदस्य सतीश मानिकपुरी ने कहा कि त्योहार का वास्तविक उद्देश्य खुशियां बांटना है। दीपावली की खुशियां तभी सार्थक होंगी, जब छोटे व्यापारी और कुम्हार परिवार भी उत्साह के साथ त्योहार मना सकें। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से छोटे व्यवसायियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

इस अवसर पर संस्था के सदस्य फिरोज कश्यप, मन्नू थवाईत, त्रिलोकी नारायण पटेल और रूपेश कंवर ने भी बच्चों को स्थानीय उत्पादों के उपयोग और पारंपरिक कला के संरक्षण का महत्व बताया।

शासकीय प्राथमिक शाला कोटगढ़ की शिक्षिका शबीना बानो खान ने फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि मिट्टी के दीये हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को मिट्टी के दीयों के उपयोग और स्थानीय बाजार से खरीदारी के लिए जागरूक करने की बात कही।

कार्यक्रम में प्रधान पाठक सिद्धि सिदार, सहायक शिक्षक शबीना बानो खान, हेमलता यादव, शशि कंवर, मीना बंजारे और डमरूधर सहित विद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

वेल विशर फाउंडेशन ने नागरिकों से अपील की कि दीपावली पर अधिक से अधिक मिट्टी के दीये जलाएं और स्थानीय कुम्हारों एवं छोटे व्यापारियों से सामान खरीदें, ताकि त्योहार की खुशियां उनके घरों तक भी पहुंच सकें।

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