26-27 नवंबर को सांची बौद्ध महोत्सव: शामिल होंगे श्रीलंका, वियतनाम और जापान के अनुयायी, दर्शनों के लिए रखी पवित्र अस्थि कलश

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रायसेनएक घंटा पहले
विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची में कोरोना के दो साल बाद मप्र शासन व श्रीलंका महाबोधी सोसायटी सांची द्वारा 70वां सांची वार्षिकोत्सव 26 व 27 नवंबर को होगा। इसमें श्रीलंका वियतनाम व जापान सहित अन्य देशों से भी बौद्ध धर्म को मानने वाले अनुयायियों का प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। महोत्सव में आने वाले पर्यटकों व अनुयायियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस व प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है।
मेले में ASF की 2 कंपनियों के साथ ही बाहर से 200 जिला पुलिस बल की टुकड़ी को तैनात किया जाएगा। दो दिवसीय सांची महोत्सव में गौतम बुद्ध के दो प्रधान शिष्यों अरहत सारिपुत्र और अरहत महामोग्गलान के पवित्र अस्थि अवशेष को दर्शनों के लिए रखा जाएगा। पूजा अर्चना के बाद बौद्ध भिक्षुओं द्वारा अस्थि कलश को सिर पर रखकर सांची स्तूप की परिक्रमा भी की जाएगी। सांची मेले में इस बार एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है। इस लिहाज से पांच स्थानों पर की व्यवस्था भी की गई है।
श्रीलंका के राजदूत और प्रदेश के तीन मंत्री भी आएंगे महाबोधि महोत्सव में भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त मिलिंद मोरगोड़ा के अलावा संस्कृति मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर, स्वास्थ्य पार्किंग मंत्री मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग और एडीजी अनुराधा शंकर भी शामिल होंगी।




तृष्णा नाटक, बधाई और नौरता लोक नृत्य की होगी प्रस्तुति
26 नवंबर को जातक कथा पर आधारित तृष्णा नाट की प्रस्तुति धन्नूलाल सिन्हा व उनके साथी कलाकार देंगे। इसी दिन अफजल हुसैन के साथ अन्य कलाकर ध्रुपद शैली में बुद्धम शरण गच्छामि गायन की प्रस्तुति देंगे। 27 नवंबर को सागर के जुगल किशोर नामदेव के साथ कलाकारों द्वारा बुंदेलखंड के बधाई व नौराता लोक नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी। इसी दिन रात में कवि सम्मेलन होगा।
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