जटगा रेंज में कूप कटाई पर विवाद, समझाइश के बाद बहाल हुआ कार्य, मदनपुर-कोलगा प्रकरण में 50 ग्रामीणों पर मामला, ग्रामसभा की अनदेखी का आरोप

कोरबा। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से अनुमति लेकर वन विभाग द्वारा हर वर्ष की जाने वाली कूप कटाई प्रक्रिया को लेकर कोरबा जिले में एक बार फिर विवाद की स्थिति बन गई है। मदनपुर-कोलगा के बाद अब कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत जटगा रेंज में कूप कटाई को लेकर ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते कुछ समय के लिए कार्य रोकना पड़ा। बाद में अधिकारियों की समझाइश के बाद काम पुनः शुरू कराया गया।
कटघोरा वनमंडल की जटगा रेंज में इस वर्ष कूप कटाई के लिए अनुपयोगी और मृतप्राय वृक्षों की पहचान कर सूची तैयार की गई थी। प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव उच्च कार्यालय भेजा गया और अनुमति मिलने के बाद कटाई का कार्य प्रारंभ हुआ। विभाग के अनुसार यह कार्य जंगल के संरक्षण और स्वस्थ वृक्षों की सुरक्षा के लिए हर वर्ष किया जाता है, ताकि बीमार पेड़ों से अन्य पेड़ों को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। अनुपयोगी वृक्षों की कटाई के बाद उनका व्यावसायिक उपयोग भी किया जाता है।
कूप कटाई शुरू होने के कुछ समय बाद रेंज के आसपास के ग्रामीणों ने विरोध जताया। ग्रामीणों का आरोप था कि अनुपयोगी पेड़ों की आड़ में हरे-भरे वृक्षों की कटाई की जा रही है, जिससे जंगल को नुकसान पहुंचेगा और उनकी आजीविका प्रभावित होगी। विरोध के चलते विभाग को कुछ स्थानों पर काम रोकना पड़ा।
इस संबंध में कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि कूप कटिंग में व्यवधान की सूचना मिलने पर अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। ग्रामीणों से चर्चा कर उन्हें कूप कटाई की प्रक्रिया और वैज्ञानिक आधार की जानकारी दी गई। आशंकाओं के समाधान के बाद कार्य को दोबारा शुरू कर पूरा कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब स्थिति सामान्य है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले कोरबा वनमंडल के मदनपुर-कोलगा क्षेत्र में कूप कटाई को लेकर तीन गांवों के ग्रामीणों और वन विभाग के बीच टकराव हो चुका है। ग्रामीणों ने जंगल और कोलगा गुफा को नुकसान पहुंचाने तथा भविष्य में कोयला खदान खोलने का रास्ता साफ करने का आरोप लगाते हुए कटाई में लगे संसाधनों को जब्त कर लिया था। बाद में वन विभाग की शिकायत पर करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र पांचवीं अनुसूची में आता है, जहां ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य है। बिना ग्रामसभा प्रस्ताव के कार्य कराए जाने को उन्होंने अनुचित बताया है। दो वर्ष पूर्व सीएमपीडीआई सर्वे को लेकर भी इसी क्षेत्र में विरोध हो चुका है।










