Chhattisgarh

आठ लाख के इनामी नक्सली ने पुलिस के समक्ष किया आत्मसमर्पण

सुकमा, 12 सितम्बर । छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल संगठन में सक्रिय आठ लाख के इनामी नक्सली ने पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारी के समक्ष बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पित नक्सली दक्षिण बस्तर बटालियन नंबर 01 के सक्रिय हार्डकोर नक्सली के रूप में सक्रिय था।जिले में चलाये जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान तथा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के प्रचार-प्रसार से प्रभावित होकर दक्षिण बस्तर बटालियन नम्बर 01 के सक्रिय हार्डकोर नक्सली ने सोमवार को सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सुकमा एसपी सुनील शर्मा, सीआरपीएफ अधिकारी दीपक कुमार सिंह, एएसपी नक्सल आप्स किरण चव्हाण के समक्ष बिना हथियार के आत्मसमर्पण किया गया हैं। आत्मसमर्पित नक्सली दुधी भीमा, चिंतागुफा थाना क्षेत्र के सुकमा जिले की निवासी है। यह नक्सली संगठन में 7 वर्ष से सक्रिय था। जिस पर छग शासन द्वारा आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। उक्त नक्सली के आत्मसमर्पण कराने में सीआरपीएफ, डीआईजी के रेंज फील्ड टीम आरएफटी का विशेष योगदान है, लगातार दूधी भीमा को प्रोत्साहित करने के फलस्वरूप दूधी भीमा द्वारा नक्सल संगठन व उनकी विचारधारा को त्याग कर शासन की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर आत्समसमर्पण किया। आत्मा समर्पित नक्सली दुधी भीमा पिडमेल-डब्बाकोंटा के बीच मार्ग अवरुद्ध करना, मिनपा मुठभेड़ वर्ष 2020 में 17 जवान शहीद, हथियार लूट की घटनाआओं में शामिल था। उक्त नक्सली नक्सल संगठन में विगत 07 वर्षो से सक्रिय था। आत्मसमर्पित नक्सली को छत्तीसगढ़ शासन की पुर्नवास योजना के तहत 10 हजार प्रोत्साहन राशि एवं पुनर्वास योजना के तहत अन्य सुविधा प्रदान की जाएगी।

एएसपी नक्सल आप्स किरण चव्हाण ने बताया कि हिड़मा की दक्षिण बस्तर बटालियन नंबर 01 के सक्रिय हार्डकोर नक्सली ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने बताया कि आत्मा समर्पित नक्सली दुधी भीमा शासन द्वारा आठ लाख रुपये का इनाम घोषित था। दूधी भीमा ने पुलिस को बताया कि नक्सलियों के बटालियन में निराशावादी वातावरण निर्मित हुआ है, जिसके कारण से कई नक्सली पुलिस के संपर्क में हैं। आने वाले एक-दो वर्षों में नक्सली संगठन से जुड़े 40 से 50 प्रतिशत नक्सली आत्मा समर्पित कर देंगे।सीआरपीएफ सेकेंड बटालियन के अधिकारी दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अंदरूनी क्षेत्र में जिस प्रकार से लगातार कैम्प खोल जा रहा हैं, इससे नक्सलियों का दायरा कम होती जा रहा है। उन्होंने कहा कि नक्सली जिस प्रकार से पहले ग्रामीणों को भ्रम में रखकर देश एवं समाज विरोधी कार्य करवाते थे अब यह चीज बदल रही है और आम ग्रामीणों को भी इसकी जानकारी होने से अब नक्सलियों का साथ छोड़ रहे हैं। अंदरूनी क्षेत्र में कैम्प खुलने के साथ ग्रामीण भी अपने क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्यों को प्राथमिकता से करवाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिसका नतीजा है कि अब नक्सलवाद का दायरा कम हो रहा है।

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