आंवला नवमी पर महिलाओं ने की पूजा: आंवले के पेड़ की पूजा कर पति-पुत्र की लंबी उम्र और सुख समृद्धि की कामना की

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नीमच8 घंटे पहले
कार्तिक मास का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इस महीने कई व्रत और त्योहार आते हैं। जिसमें दिवाली के बाद आने वाली आंवला नवमी व्रत का विशेष महत्व है। आंवला नवमी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस खास दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। स्वस्थ रहने की कामना के साथ आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवला नवमी में आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर पूजा-अर्चना कर ही भोजन किया जाता है। इस दिन आंवला को प्रसाद के रूप में भी खाया जाता है।
मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन व्रत कथा पढ़ने या सुनने से भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस साल आंवला नवमी 2 नवंबर, बुधवार को मनाई गई। शहर सहित अंचल में महिलाओं ने आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर आंवले की माला चढ़ाई ओर प्रसाद ग्रहण कर आंवले के पेड़ के नीचे ही भोजन भी किया। आंवला नवमी को अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन किए गए कार्य को शुभ और अटूट माना जाता है। कार्तिक स्न्नान करने वाली महिलाओं द्वारा सूर्योदय के साथ ही शहर के बगीचों व मंदिरों में आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना की गई।
इसके साथ ही श्रद्धालु महिलाएं जड़ में दूध की धारा गिराकर, पेड़ के चारों और सूत लपेटकर कपूर से आरती कर आंवले के वृक्ष की 9 या 11 या फिर 108 परिक्रमा लगाती है। इसके साथ ही आंवला नवमी की कहानी सुनकर पति-पुत्र की लम्बी आयु व सुख-समृद्वि की समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करती है।
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