Chhattisgarh

अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना से बदली राजेन्द्र–योगिता की जिंदगी, 2.50 लाख की सहायता से मिली नई उड़ान

कोरबा। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और अस्पृश्यता निवारण के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना आकांक्षी जिला कोरबा में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन रही है। इस योजना के तहत लाभान्वित होकर राजेन्द्र आनंद और योगिता के जीवन में खुशियां बिखर गई हैं। गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने नवदंपत्ति को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेन्द्र आनंद पिता मुकुल आनंद, अनुसूचित जाति, निवासी इंदिरा नगर वार्ड क्रमांक 03 जिला कोरबा तथा योगिता पिता साधुराम, जाति मरार (अन्य पिछड़ा वर्ग), निवासी कांकेर के मध्य संपन्न अंतरजातीय विवाह को शासन की योजना के अंतर्गत मान्यता दी गई। विवाह उपरांत छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना के अंतर्गत दंपत्ति को कुल 2 लाख 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने नवदंपत्ति को प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए उनके सफल दांपत्य जीवन की कामना की। शासन द्वारा दी गई राशि में से 1 लाख रुपये दंपत्ति के संयुक्त बैंक खाते में सीधे भुगतान किए गए हैं, जबकि शेष 1 लाख 50 हजार रुपये को उनके भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से 3 वर्ष की सावधि जमा (एफडी) में रखा गया है।

उल्लेखनीय है कि चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक जिले के 10 नवदंपत्ति इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं, जो योजना की उपयोगिता और सामाजिक प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यह योजना न केवल आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि समाज में समानता, भाईचारे और सामाजिक एकता को भी मजबूत कर रही है।

योजना के अंतर्गत पात्र विवाहित जोड़े को अधिकतम ₹2.50 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। पात्रता की शर्तों के अनुसार दूल्हा या दुल्हन में से एक का अनुसूचित जाति से होना अनिवार्य है, जबकि दूसरा जीवनसाथी गैर-अनुसूचित जाति से होना चाहिए। यह दोनों का पहला विवाह होना चाहिए और विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत विधिवत पंजीकृत होना आवश्यक है। साथ ही, दंपत्ति का छत्तीसगढ़ का निवासी होना और विवाह के एक वर्ष के भीतर आवेदन करना अनिवार्य है।

आवेदन के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड तथा संयुक्त बैंक खाते का विवरण आवश्यक होता है। इच्छुक आवेदक जिले के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के जिला कार्यालय, कलेक्ट्रेट में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभाग की आधिकारिक वेबसाइट tribal.cg.gov.in पर भी योजना से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

यह योजना कोरबा जिले में सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है, जो अंतरजातीय विवाह को सम्मान और सुरक्षा प्रदान कर समाज को नई दिशा दे रही है।

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